By;Vikash Kumar (vicky)
20 फरवरी 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। सनातन परंपरा में पंचांग के आधार पर ही दिन का शुभ और अशुभ समय निर्धारित किया जाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा-पाठ और नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हालांकि पंचक और भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए कार्यों की योजना बनाते समय सावधानी रखना आवश्यक है।

तिथि और नक्षत्र का संपूर्ण विवरण
पंचांग के अनुसार 20 फरवरी को तृतीया तिथि शाम 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन तृतीया तिथि ही मान्य होगी। नक्षत्र की बात करें तो उत्तर भाद्रपद नक्षत्र शाम 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, इसके बाद रेवती नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा।

योग साध्य शाम 6 बजकर 23 मिनट तक प्रभावी रहेगा। करण गर दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अन्य करण प्रारंभ होगा। यह संयोग आध्यात्मिक साधना और सकारात्मक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और प्रमुख शुभ मुहूर्त
इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और जप के लिए श्रेष्ठ समय है।

अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। अमृत काल दोपहर 3 बजकर 28 मिनट से शाम 5 बजकर 1 मिनट तक है।

विशेष रूप से सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग शाम 8 बजकर 7 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यह समय नए कार्य, विवाह, गृह प्रवेश, निवेश और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 11 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 3 बजकर 25 मिनट से 4 बजकर 50 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 8 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इन समयों में नए कार्यों की शुरुआत से बचना उचित माना जाता है।

पंचक और भद्रा का प्रभाव
भद्रा रात 1 बजकर 51 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। पंचक पूरे दिन मान्य रहेगा। पंचक के दौरान अग्नि कार्य, लकड़ी से जुड़े कार्य, यात्रा या निर्माण कार्य से बचने की सलाह दी जाती है। भद्रा काल में शुभ मांगलिक कार्य स्थगित रखना बेहतर होता है।

शुक्रवार का धार्मिक महत्व
शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। व्रत, दीपदान और श्रीसूक्त का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।

जो लोग नए कार्य की शुरुआत करने की सोच रहे हैं, वे शुभ मुहूर्त और योग को ध्यान में रखकर निर्णय लें। सही समय पर किया गया कार्य सफलता और सकारात्मक परिणाम देता है।
यह लेख पारंपरिक पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। स्थान के अनुसार समय में परिवर्तन संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
