By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ तीसरी हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी, आधुनिक और आपस में बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया गया। बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी, सुरक्षा, विदेश मामलों और शासन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सोच के साथ काम करने का आह्वान किया।

विभागों के बीच तालमेल की कमी पर PM मोदी का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में सरकारी विभागों के अलग-अलग तरीके से काम करने की समस्या पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच तालमेल की कमी केवल संगठनात्मक या प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सोच से जुड़ी हुई चुनौती भी है। यानी अलग-अलग विभाग अगर केवल अपने-अपने दायरे में काम करेंगे तो जटिल राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान तेजी से नहीं किया जा सकता। PM मोदी ने अधिकारियों से “साइलो” यानी विभागीय खांचों से बाहर निकलकर काम करने की जरूरत बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालय और विभाग एक टीम की तरह काम करें और साझा उद्देश्य के साथ नीतियों को जमीन पर लागू करें। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में दोहराव कम करने और सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।

Whole-of-Government Approach पर जोर
प्रधानमंत्री ने सरकारी कामकाज में Whole-of-Government Approach को मजबूत करने की बात कही। इसका मतलब है कि किसी बड़े मुद्दे पर केवल एक मंत्रालय या विभाग जिम्मेदारी निभाने के बजाय संबंधित सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। आज के समय में कई योजनाएं ऐसी हैं जिनका संबंध एक से अधिक क्षेत्रों से होता है। उदाहरण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सेवाएं, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में कई मंत्रालयों की भूमिका होती है। ऐसे में यदि विभागों के बीच सही समय पर डेटा और जानकारी साझा हो तथा निर्णय सामूहिक दृष्टिकोण से लिए जाएं, तो सरकारी योजनाओं का असर और बेहतर हो सकता है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से टीम भावना विकसित करने और आपसी संवाद बढ़ाने की भी अपील की। उनका मानना है कि बेहतर प्रशासन के लिए केवल नियम और प्रक्रियाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अधिकारियों के बीच भरोसा, सहयोग और साझा जिम्मेदारी की भावना भी जरूरी है।

डेटा को बताया भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संसाधन
बैठक में डेटा के प्रभावी इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बताया। इसका सीधा मतलब है कि सरकार के पास मौजूद आंकड़ों का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नीति निर्माण और बेहतर निर्णय लेने में भी किया जाना चाहिए। अगर अलग-अलग सरकारी विभागों के डेटा को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आपस में जोड़ा जाए, तो सरकार को योजनाओं की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। इससे जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने, समस्याओं की पहचान करने और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि डेटा के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसकी सुरक्षा और गोपनीयता भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए डेटा आधारित प्रशासन के साथ मजबूत साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार डेटा प्रबंधन की जरूरत भी बनी रहेगी।

AI के इस्तेमाल को लेकर PM मोदी का विजन
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के प्रभावी इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने AI की क्षमताओं को मानव विशेषज्ञता के साथ जोड़ने और ऐसे नए तरीके खोजने पर जोर दिया, जिनसे AI का इस्तेमाल सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने में किया जा सके। साथ ही उन्होंने मानव हस्तक्षेप और अंतिम निर्णय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। AI का इस्तेमाल सरकारी व्यवस्था में कई स्तरों पर किया जा सकता है। बड़े पैमाने पर डेटा का विश्लेषण, नागरिक सेवाओं में सहायता, योजनाओं की निगरानी, संभावित समस्याओं की पहचान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज करने जैसे क्षेत्रों में इसका उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत सरकार पहले से ही अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में AI के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाश रही है। PIB के अनुसार, AI आधारित हस्तक्षेप के लिए 62 मंत्रालयों और विभागों से 762 समस्या विवरणों की पहचान की गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार AI को केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित न रखकर शासन और सार्वजनिक सेवाओं में भी उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

AI के साथ इंसानी विशेषज्ञता भी जरूरी
AI को लेकर प्रधानमंत्री का संदेश केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने AI की क्षमता को मानव विशेषज्ञता के साथ जोड़ने पर जोर दिया है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सरकारी फैसलों का सीधा असर करोड़ों नागरिकों पर पड़ता है। AI किसी बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण तेजी से कर सकता है, लेकिन किसी नीति का सामाजिक प्रभाव, स्थानीय परिस्थितियां और मानवीय जरूरतों को समझने के लिए मानवीय अनुभव और विशेषज्ञता की जरूरत बनी रहती है। इसलिए भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था में AI और मानव निर्णय क्षमता का संतुलित इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

युवाओं और विश्वविद्यालयों को जोड़ने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच बेहतर संवाद और सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य नीति निर्माण में नए विचार और नए दृष्टिकोण शामिल करना है। तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों के बीच सरकार के सामने लगातार नई चुनौतियां आ रही हैं। ऐसे में युवा विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों से मिलने वाले नए विचार प्रशासन को अधिक आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद कर सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?
PM मोदी की सचिवों के साथ यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें प्रशासनिक व्यवस्था को केवल विभागीय स्तर पर नहीं, बल्कि एक एकीकृत प्रणाली के रूप में देखने पर जोर दिया गया। विभागीय तालमेल, डेटा, AI और दीर्घकालिक सोच को एक साथ जोड़ने का उद्देश्य सरकारी निर्णय प्रक्रिया को अधिक तेज, प्रभावी और परिणाम आधारित बनाना है। अगर अलग-अलग मंत्रालय अपने डेटा और विशेषज्ञता को साझा करते हुए एक साथ काम करते हैं, तो कई योजनाओं को जमीन पर लागू करने में आने वाली अड़चनें कम हो सकती हैं। इससे नागरिकों को सरकारी सेवाएं अधिक आसानी से और तेजी से मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सचिवों के साथ हाई-लेवल बैठक का फोकस सरकारी कामकाज में समन्वय, तकनीक और भविष्य की सोच को मजबूत करने पर रहा। PM मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि विभागीय सीमाओं में बंटकर काम करने के बजाय साझा उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना जरूरी है।

AI और डेटा आने वाले समय में प्रशासन की कार्यशैली को बदलने की क्षमता रखते हैं, लेकिन इसका प्रभाव तभी अधिक होगा जब तकनीक के साथ मानव विशेषज्ञता, जवाबदेही, डेटा सुरक्षा और विभागीय तालमेल भी मजबूत किया जाए। ऐसे में प्रधानमंत्री का Whole-of-Government Approach भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक एकीकृत और परिणाम-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

