By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
पंजाब में चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में उनका नाम उन मतदाताओं की सूची में दर्ज है, जिन्हें ASDD यानी Absent, Shifted, Deceased और Duplicate श्रेणी के तहत ड्राफ्ट सूची से बाहर किया गया है। उनके नाम के सामने कारण के तौर पर ‘Permanently Shifted’ दर्ज किया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद राघव चड्ढा ने इसे लेकर आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चड्ढा का आरोप है कि उनके खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की गई है। वहीं, आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

क्या है पूरा मामला?
पंजाब में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण किया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में नामों को अलग-अलग कारणों से हटाया गया। पंजाब में करीब 20.66 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए हैं। इसी सूची में राघव चड्ढा का नाम भी शामिल है और उनके नाम के सामने ‘Permanently Shifted’ लिखा गया है। राघव चड्ढा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका वोटर रजिस्ट्रेशन मोहाली में है और वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में उन्हें स्थायी रूप से पंजाब से बाहर स्थानांतरित बताया जाना सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नामों को लेकर विशेष प्रावधान हैं।

राघव चड्ढा ने AAP पर क्या आरोप लगाए?
नाम हटने के बाद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा और इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखा। उनका कहना है कि यह महज कोई सामान्य या क्लेरिकल गलती नहीं है, बल्कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने का मामला हो सकता है। चड्ढा का आरोप इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह पहले आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद चुने गए थे। बाद में उनके राजनीतिक समीकरण बदल गए और अब वह बीजेपी के साथ हैं। इसी पृष्ठभूमि में पंजाब की मतदाता सूची से उनका नाम हटना राज्य की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि फिलहाल यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। इसलिए ड्राफ्ट में नाम नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता का नाम स्थायी रूप से समाप्त हो गया है। संबंधित मतदाता दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने की मांग कर सकता है।

AAP और पंजाब सरकार का क्या कहना है?
राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने राजनीतिक बदले की बात को खारिज किया है। AAP का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने और SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है। राज्य सरकार इस प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं करती। पंजाब सरकार से जुड़े अधिकारियों ने भी यही बात कही है कि मतदाता सूची तैयार करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। दूसरी तरफ, AAP की ओर से यह सवाल भी उठाया गया है कि चड्ढा की ओर से दिल्ली में मतदाता पंजीकरण स्थानांतरित करने की प्रक्रिया से संबंधित क्या स्थिति थी। यानी विवाद सिर्फ नाम हटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि चड्ढा का वास्तविक मतदाता पंजीकरण किस स्थान पर होना चाहिए।

‘Permanently Shifted’ शब्द पर क्यों मचा विवाद?
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ‘Permanently Shifted’ शब्द को लेकर हो रही है। मतदाता सूची में किसी व्यक्ति को इस श्रेणी में दर्ज करने का मतलब यह माना जाता है कि संबंधित रिकॉर्ड के अनुसार मतदाता अपने पुराने पते से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुका है। राघव चड्ढा का सवाल है कि उन्हें किस आधार पर ‘Permanently Shifted’ बताया गया। यही सवाल अब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पर भी बहस खड़ी कर रहा है।

हालांकि, चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के व्यापक संदर्भ को भी समझना जरूरी है। इस अभियान के दौरान सिर्फ राघव चड्ढा का नाम नहीं हटाया गया है, बल्कि देशभर में बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड की समीक्षा की गई है। पंजाब में भी लाखों नाम ASDD श्रेणियों में शामिल किए गए हैं। इसलिए किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होना अपने आप में राजनीतिक साजिश का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अब आगे क्या होगा?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं है। ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद पात्र मतदाताओं को अपने नाम से संबंधित दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलता है। राघव चड्ढा भी इसी प्रक्रिया के तहत अपने नाम को लेकर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस मामले में आगे चुनाव आयोग की जांच और संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अगर रिकॉर्ड की जांच के बाद यह सामने आता है कि नाम गलत तरीके से ‘Permanently Shifted’ दर्ज हुआ, तो उसे सुधारने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

क्या राघव चड्ढा के आरोप सही हैं?
फिलहाल राघव चड्ढा ने राजनीतिक बदले का आरोप लगाया है, लेकिन इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। दूसरी ओर AAP ने साफ तौर पर किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से इनकार किया है और कहा है कि SIR चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। इसलिए इस पूरे विवाद को फिलहाल आरोप बनाम जवाब के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा। इस मामले का अंतिम निष्कर्ष तभी सामने आएगा जब संबंधित अधिकारियों की जांच, रिकॉर्ड और दावा-आपत्ति प्रक्रिया पूरी होगी। ऐसे में ‘Permanently Shifted’ की एंट्री को लेकर उठे सवाल अब चुनाव आयोग के रिकॉर्ड और आगे की कार्रवाई पर टिके हुए हैं।

राघव चड्ढा का नाम पंजाब की SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटना और उनके नाम के सामने ‘Permanently Shifted’ लिखा होना पंजाब की राजनीति में नया विवाद बन गया है। चड्ढा इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, जबकि AAP और पंजाब सरकार इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। चूंकि यह अभी ड्राफ्ट सूची है, इसलिए अंतिम तस्वीर दावा-आपत्ति और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है—क्या राघव चड्ढा का नाम वास्तव में रिकॉर्ड संबंधी गलती के कारण हटाया गया या इसके पीछे कोई अन्य वजह है? इसका जवाब चुनाव आयोग की जांच और अंतिम मतदाता सूची के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

