By: Vikash Kumar (Vicky)


देवघर/तारापीठ। देवघर में श्रावणी मेला के दौरान सेवा शिविर के सफल आयोजन के बाद महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से ‘रोज मौसी’ के नाम से जानते हैं, इन दिनों पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के प्रसिद्ध तारापीठ में विशेष साधना और हवन अनुष्ठान में जुटी हुई हैं। कौशिकी अमावस्या के अवसर पर 9, 10 और 11 सितंबर तक आयोजित किए जा रहे इस विशेष शिविर में लगातार धार्मिक अनुष्ठान और हवन का आयोजन हो रहा है। शिविर की खास बात यह है कि यहां हर दिन नए श्रद्धालुओं के साथ-साथ पुराने भक्त और यजमान भी पहुंच रहे हैं और विशेष हवन में शामिल होकर मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
विशेष साधना शिविर के दौरान महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी स्वयं साधना में बैठकर अपने भक्तों और यजमानों की कुशलता, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने तारापीठ स्थित मां के मंदिर में स्वयं पहुंचकर पूजा-अर्चना की और अपने सभी भक्तों एवं यजमानों की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी का कहना है कि उनके लिए भक्त और यजमान केवल धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े लोग नहीं हैं, बल्कि परिवार के सदस्यों के समान हैं। उनकी साधना और पूजा का एक प्रमुख उद्देश्य यही है कि उनके सभी यजमान स्वस्थ, सुखी, समृद्ध और खुशहाल रहें। इसी भावना के साथ वह तारापीठ में विशेष साधना और हवन कर रही हैं।

तारापीठ मंदिर पहुंचकर की भक्तों के लिए प्रार्थना
कौशिकी अमावस्या के अवसर पर तारापीठ में धार्मिक गतिविधियों का विशेष महत्व देखा जा रहा है। इसी दौरान महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने तारापीठ मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन किए और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपने भक्तों और यजमानों की कुशलता के लिए मां से प्रार्थना की।
मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान उन्होंने सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि भक्तों की आस्था और उनके विश्वास को बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि विशेष अवसरों पर वह अपने भक्तों और यजमानों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करती हैं।

हर दिन हवन में शामिल हो रहे नए और पुराने भक्त
तारापीठ में लगाए गए इस विशेष साधना शिविर में हर दिन श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिल रही है। खास बात यह है कि हवन में शामिल होने के लिए प्रतिदिन नए भक्त पहुंच रहे हैं। वहीं, महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी से लंबे समय से जुड़े पुराने भक्त और यजमान भी शिविर में पहुंचकर हवन में आहुति दे रहे हैं।
हवन के दौरान श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में शामिल होकर मां का स्मरण करते हैं और महामंडलेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शिविर में आने वाले भक्तों के बीच भी उत्साह का माहौल बना हुआ है। नए भक्त जहां पहली बार इस आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं, वहीं पुराने भक्तों के लिए भी यह अवसर विशेष आस्था और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है।
शिविर परिसर में मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। इसके अलावा विशेष रूप से तैयार किए गए हवन कुंड में धार्मिक विधि-विधान के साथ आहुतियां दी जा रही हैं। हवन के दौरान श्रद्धालु भी अपनी श्रद्धा के अनुसार इसमें शामिल हो रहे हैं।

यजमानों की कुशलता के लिए विशेष हवन
महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी ने बताया कि विशेष हवन उनके यजमानों और भक्तों की मंगलकामना को समर्पित है। उनका कहना है कि वह चाहती हैं कि उनके सभी यजमान अपने जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त करें। उनके परिवार में खुशहाली बनी रहे और सभी लोग स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें।
उन्होंने कहा कि भक्तों की खुशी ही उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है। जब उनके यजमान और भक्त खुश रहते हैं तो उन्हें भी आत्मिक संतोष मिलता है। इसी भावना के साथ वह तारापीठ में साधना और हवन कर रही हैं।
साधना के साथ सेवा की भावना
महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी का धार्मिक जीवन साधना के साथ सेवा से भी जुड़ा रहा है। देवघर में सावन महीने के दौरान उनके सेवा शिविर में बड़ी संख्या में कांवरियों और श्रद्धालुओं की सेवा की गई थी। श्रावणी मेला समाप्त होने के बाद अब तारापीठ में विशेष साधना शिविर के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है।

देवघर के बाद तारापीठ में आयोजित इस शिविर को लेकर उनके भक्तों और यजमानों में भी उत्साह है। कई श्रद्धालु इस विशेष अवसर पर तारापीठ पहुंच रहे हैं और हवन में शामिल होकर धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बन रहे हैं।
शिविर में सहयोगियों की अहम भूमिका
विशेष साधना शिविर को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में महामंडलेश्वर के शिष्य, चेले-नाती और सहयोगी लगातार जुटे हुए हैं। अजीत कुमार सिंह, जिन्हें रुद्र प्रताप सिंह के नाम से भी जाना जाता है, अजय औघड़ सहित कई सहयोगी शिविर की व्यवस्था संभालने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

शिविर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजा-अर्चना और हवन से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सहयोगी लगातार काम कर रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पूरे शिविर परिसर में आस्था और भक्ति का वातावरण बना हुआ है।
कौशिकी अमावस्या पर विशेष धार्मिक वातावरण
कौशिकी अमावस्या के अवसर पर तारापीठ में हर वर्ष विशेष धार्मिक गतिविधियां देखने को मिलती हैं। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और साधक तारापीठ पहुंचते हैं। मां तारा की आराधना के लिए प्रसिद्ध तारापीठ में इस विशेष अवसर पर भक्तों की आस्था और श्रद्धा देखते ही बनती है।

इसी धार्मिक वातावरण के बीच महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी द्वारा आयोजित विशेष साधना एवं हवन शिविर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन नए भक्तों का शिविर से जुड़ना और पुराने भक्तों का दोबारा पहुंचकर हवन में शामिल होना इस आयोजन के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाता है।
महामंडलेश्वर स्वयं साधना में बैठकर धार्मिक अनुष्ठान कर रही हैं और समय निकालकर तारापीठ मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन एवं पूजा-अर्चना भी कर रही हैं। मंदिर में उन्होंने अपने सभी भक्तों और यजमानों के लिए कुशलता एवं मंगलकामना की प्रार्थना की।

कौशिकी अमावस्या के अवसर पर 9 से 11 सितंबर तक चलने वाले इस विशेष शिविर में हवन और साधना का क्रम जारी है। शिविर में हर दिन नए श्रद्धालु जुड़ रहे हैं, जबकि पुराने भक्त और यजमान भी अपनी आस्था के साथ पहुंचकर हवन में आहुति दे रहे हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

तारापीठ में आयोजित यह विशेष साधना शिविर महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी की साधना, सेवा और अपने भक्तों एवं यजमानों के प्रति उनकी भावना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। भक्तों की कुशलता और सुख-समृद्धि की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का यह क्रम लगातार जारी है।
