By: Mala Mandal
नई दिल्ली: UGC-NET जून 2026 की तीन विषयों की परीक्षाओं को दोबारा कराने के फैसले को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने English, Commerce और Sociology विषयों की परीक्षाओं में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों के बाद इन पेपरों को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और NTA पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की गलती का खामियाजा आखिर छात्रों को क्यों भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NTA को निशाने पर लेते हुए कहा कि हजारों छात्रों ने महीनों तक मेहनत की, परीक्षा की तैयारी की, फीस जमा की और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे, लेकिन अब उन्हें दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।

UGC-NET के तीन पेपर क्यों हुए रद्द?
UGC-NET जून 2026 की परीक्षाएं 22 जून से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। बाद में तीन विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर उम्मीदवारों की ओर से कई शिकायतें सामने आईं। शिकायतों में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, तथ्यात्मक गलतियों, भाषा और अनुवाद संबंधी समस्याओं के साथ-साथ दोहराए गए सवालों का मुद्दा शामिल था। जांच के बाद NTA ने माना कि English, Commerce और Sociology के प्रश्नपत्रों में ऐसी कमियां थीं जिन्हें केवल कुछ प्रश्न हटाकर या उत्तर कुंजी में सुधार करके ठीक करना संभव नहीं था। इसके बाद इन तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान Sociology के पेपर में बड़ी संख्या में दोहराए गए प्रश्नों की बात भी सामने आई। एक रिपोर्ट में 67 दोहराए गए सवालों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा प्रश्नपत्रों में वर्तनी, तथ्य और अनुवाद से जुड़ी गलतियों की भी पहचान की गई।

9 और 10 सितंबर को होगी दोबारा परीक्षा
NTA के फैसले के अनुसार English, Commerce और Sociology विषयों के प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा सितंबर में आयोजित की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुनर्परीक्षा 9 और 10 सितंबर 2026 को होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी होगी, उनसे इसके लिए कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं UGC-NET के बाकी 84 विषयों की परीक्षाएं इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगी। इस फैसले का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और उम्मीदवारों के साथ निष्पक्षता बनाए रखना बताया गया है। NTA के सामने चुनौती यह भी होगी कि दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा में किसी तरह की तकनीकी, प्रशासनिक या प्रश्नपत्र संबंधी समस्या न हो।

राहुल गांधी ने सरकार पर क्यों साधा निशाना?
राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका मुख्य तर्क है कि परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी जिस एजेंसी के पास है, अगर गलती उसी स्तर पर होती है तो उसका नुकसान छात्रों को क्यों उठाना पड़े? UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके जरिए उम्मीदवार Junior Research Fellowship (JRF), Assistant Professor के लिए पात्रता और कुछ मामलों में PhD प्रवेश से जुड़ी पात्रता हासिल करते हैं। NTA की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक UGC-NET इन्हीं पात्रताओं को निर्धारित करने वाली परीक्षा है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने का मतलब केवल दोबारा कुछ घंटे परीक्षा देना नहीं है। उम्मीदवारों को फिर से तैयारी करनी पड़ती है, यात्रा करनी पड़ सकती है और परीक्षा परिणाम में देरी के कारण आगे की शैक्षणिक योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

छात्रों के लिए क्यों बड़ा मुद्दा है UGC-NET?
UGC-NET देश की प्रमुख उच्च शिक्षा प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं में से एक है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। कई उम्मीदवार लंबे समय तक पढ़ाई और कोचिंग के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं। अगर परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र में गंभीर खामियां सामने आती हैं और पूरी परीक्षा दोबारा करानी पड़ती है तो इससे उम्मीदवारों के समय और मानसिक दबाव पर असर पड़ना स्वाभाविक है। खास तौर पर उन उम्मीदवारों के लिए स्थिति कठिन हो सकती है, जिन्होंने पहली परीक्षा के बाद परिणाम और आगे की प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर दी थी। अब उन्हें सितंबर में फिर से परीक्षा देनी होगी।

क्या राहुल गांधी की आलोचना जायज है?
राहुल गांधी द्वारा उठाया गया सवाल परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी समीक्षा, अनुवाद, तथ्य जांच और परीक्षा संचालन तक कई स्तरों पर गुणवत्ता नियंत्रण जरूरी होता है। यदि किसी परीक्षा में गंभीर त्रुटियां पाई जाती हैं तो उसे दोबारा कराना निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम हो सकता है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि ऐसी गलतियां पहली बार में क्यों नहीं पकड़ी गईं और भविष्य में उन्हें रोकने के लिए क्या व्यवस्था बनाई जाएगी। दूसरी ओर, NTA का परीक्षा दोबारा कराने का फैसला इस मायने में महत्वपूर्ण है कि एजेंसी ने शिकायतों और जांच के बाद प्रभावित तीन विषयों के लिए सुधारात्मक कदम उठाया है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि सितंबर में होने वाली पुनर्परीक्षा कितनी पारदर्शी और त्रुटिरहित तरीके से आयोजित होती है।

सरकार और NTA के सामने जवाबदेही की चुनौती
UGC-NET विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता और परीक्षा संचालन की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। छात्रों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही रहती है कि परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी हो, प्रश्नपत्र उच्च गुणवत्ता वाला हो और परिणाम समय पर जारी किए जाएं।
राहुल गांधी के बयान ने इस प्रशासनिक मुद्दे को राजनीतिक बहस में बदल दिया है। कांग्रेस जहां इसे सरकार और NTA की विफलता के रूप में देख रही है, वहीं परीक्षा व्यवस्था के स्तर पर अब ध्यान इस बात पर है कि प्रभावित उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

कुल मिलाकर, UGC-NET जून 2026 के तीन विषयों की परीक्षा रद्द होने का मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। यह हजारों उम्मीदवारों के भविष्य, परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा है।
राहुल गांधी का यह सवाल कि “गलती NTA की है तो सजा छात्रों को क्यों?” अब सरकार और NTA के लिए एक बड़ी जवाबदेही की बहस बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि NTA दोबारा परीक्षा को कितनी पारदर्शिता के साथ आयोजित करता है और ऐसी गलतियों को भविष्य में रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

