By: Vikash, Mala Mandal
बगलामुखी जयंती का महत्व
हिंदू धर्म में मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक अत्यंत शक्तिशाली देवी माना जाता है। इनकी उपासना विशेष रूप से शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामलों, नकारात्मक शक्तियों और जीवन में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए की जाती है। वर्ष 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार के दिन मनाई जा रही है। यह दिन साधना और उपायों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़े प्रभावशाली परिणाम देते हैं।

पीले रंग का धार्मिक महत्व
मां बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी और पीली सरसों का विशेष महत्व होता है। यदि आप जीवन में किसी शत्रु, विरोधी या बाधा से परेशान हैं, तो बगलामुखी जयंती के दिन पीली सरसों का यह सरल उपाय आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

पीली सरसों का सरल उपाय कैसे करें
सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां बगलामुखी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। अब एक मुट्ठी पीली सरसों लें और उसे अपने दाएं हाथ में रखें। ध्यान लगाकर मां बगलामुखी का स्मरण करें और अपने मन की समस्या या शत्रु बाधा को समाप्त करने की प्रार्थना करें। इसके बाद “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

उपाय के बाद क्या करें
जाप पूरा होने के बाद उस पीली सरसों को किसी सुनसान स्थान या बहते पानी में प्रवाहित कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से शत्रु की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और वह स्वयं शांत हो जाता है। यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो बार-बार विरोध, षड्यंत्र या मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

दान और पुण्य का महत्व
इसके अलावा, इस दिन गरीबों को पीले वस्त्र, चने की दाल या हल्दी दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इससे मां बगलामुखी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। जो लोग कोर्ट केस या किसी विवाद में फंसे हैं, उनके लिए भी यह दिन विशेष फलदायी होता है।

जरूरी सावधानियां
ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस दिन किए गए उपाय पूरी श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक भावना के साथ ही करने चाहिए। किसी के अहित की भावना से किए गए उपायों का विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। किसी भी उपाय को करने से पहले अपने विवेक का प्रयोग करें।

