By: Vikash, Mala Mandal
आज का दिन क्यों है खास
आज 28 अप्रैल 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का संयोग बन रहा है। साथ ही भौम प्रदोष व्रत, त्रिपुष्कर योग और सिद्धिलक्ष्मी जयंती जैसे विशेष योग इस दिन को और भी शुभ बना रहे हैं।

भौम प्रदोष और पूजा का महत्व
मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत ‘भौम प्रदोष’ कहलाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि संध्या काल में विधिपूर्वक पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

त्रिपुष्कर योग और शुभ संयोग
आज बन रहा त्रिपुष्कर योग किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए नए कार्य, निवेश या पूजा के लिए यह दिन लाभकारी है।
आज के प्रमुख पर्व और व्रत
आज मोहिनी एकादशी, सिद्धिलक्ष्मी जयंती और त्रिशूर पूरम जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जा रहे हैं। ये सभी पर्व धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं और भक्तों के लिए पुण्य प्राप्ति का अवसर प्रदान करते हैं।

सूर्य और चंद्रमा का समय
आज सूर्योदय सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 50 मिनट पर। चंद्रमा का उदय शाम 4 बजे और अस्त अगले दिन सुबह 4 बजकर 03 मिनट पर होगा।
विक्रम और शक संवत की जानकारी
विक्रम संवत 2083 के अनुसार यह सिद्धार्थि नाम संवत्सर है, जबकि शक संवत 1948 पराभव नाम से जाना जाता है। दोनों पंचांगों के अनुसार यह समय धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आज की तिथि का विवरण
शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 27 अप्रैल शाम 6 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 28 अप्रैल शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होकर अगले दिन तक जारी रहेगी, जो प्रदोष व्रत के लिए विशेष मानी जाती है।
अशुभ समय (राहुकाल और अन्य काल)
आज राहुकाल दोपहर 3 बजकर 34 मिनट से शाम 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 9 बजकर 02 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक और कुलिक काल दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 23 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक और रात 11 बजकर 12 मिनट से 11 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। वर्ज्य काल सुबह 4 बजकर 53 मिनट से 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त और श्रेष्ठ समय
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। अमृत काल दोपहर 2 बजकर 59 मिनट से 4 बजकर 40 मिनट तक और ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 10 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। ये सभी समय पूजा-पाठ और नए कार्यों के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।

आज क्या करें और क्या न करें
आज के शुभ योगों का लाभ उठाते हुए पूजा, दान और नए कार्यों की शुरुआत करें। वहीं राहुकाल और अन्य अशुभ समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए।
यह पंचांग और जानकारी वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

