By: Mala Mandal
देवघर। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में सत्संग आश्रम लगातार महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। सत्संग के प्रधानाचार्य परमपूज्यपाद श्रीश्रीआचार्यदेव की प्रेरणा और इच्छा के अनुरूप गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी देवघर जिले के किसानों के बीच उन्नत किस्म के धान बीज का वितरण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य कम लागत, कम पानी और कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना है।

सत्संग आश्रम की ओर से इस वर्ष कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), सुजानी, देवघर के माध्यम से लगभग 7 क्विंटल “सहभागी” किस्म के धान बीज किसानों को प्रत्यक्षण हेतु उपलब्ध कराए जाएंगे। यह धान की ऐसी उन्नत किस्म है जो कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से लगभग 3 क्विंटल सहभागी धान बीज किसानों के बीच वितरित किया गया था। इसका परिणाम बेहद उत्साहजनक रहा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस किस्म की उपज 42 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई, जो पारंपरिक स्थानीय धान किस्मों की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत अधिक है।

लाभान्वित किसानों ने बताया कि सहभागी धान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता है। बदलते मौसम और अनिश्चित वर्षा की परिस्थितियों में यह किस्म किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है। यही कारण है कि इस वर्ष इसकी मांग को देखते हुए वितरण की मात्रा भी बढ़ाई गई है।
सत्संग आश्रम द्वारा केवल सहभागी धान ही नहीं, बल्कि 5 क्विंटल “वीडसाइड टॉलरेंट (CR DHAN 807)” किस्म का धान बीज भी किसानों के बीच वितरित किया जाएगा। यह धान की एक उन्नत प्रजाति है जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (NRRI), कटक, ओडिशा द्वारा विकसित किया गया है। यह किस्म खरपतवार नियंत्रण की दृष्टि से किसानों के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है और खेती की लागत को कम करने में सहायक है।

किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए सत्संग आश्रम पिछले कई वर्षों से कृषि क्षेत्र में लगातार योगदान दे रहा है। इसी क्रम में गत वर्ष आश्रम की ओर से चार अत्याधुनिक 9 रो मल्टी क्रॉप सीड कम फर्टिलाइजर प्लांटर मशीनें कृषि विज्ञान केंद्र, देवघर को उपलब्ध कराई गई थीं। इन मशीनों को कृषि विज्ञान केंद्र ने विधिवत स्वीकार कर किसानों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया है। आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग से किसानों को समय, श्रम और लागत तीनों में बचत हो रही है।
सत्संग आश्रम द्वारा हर वर्ष किसानों के बीच विभिन्न प्रकार के उपयोगी पौधों का भी वितरण किया जाता है। इनमें करी पत्ता, ड्वार्फ हाईब्रिड सहजन, विभिन्न किस्मों की मिर्च समेत कई पौधे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आश्रम के कम्पोस्ट प्लांट से तैयार जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के लिए केंचुए (अर्थवर्म) भी किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता में भी वृद्धि हो रही है।

कृषि क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए सत्संग प्रबंधन ने पूसा विश्वविद्यालय, समस्तीपुर के सहयोग से देवघर एवं आसपास के क्षेत्रों में उगाई जा रही औषधीय जड़ी-बूटियों की खरीद की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। इसके तहत किसानों द्वारा उत्पादित औषधीय पौधों को सीधे उनके खलिहान से उचित मूल्य पर खरीदा जाएगा। इससे किसानों को बाजार की समस्याओं से राहत मिलेगी और उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी सत्संग आश्रम की भूमिका उल्लेखनीय रही है। पिछले सात वर्षों से सत्संग आश्रम की ओर से देवघर वन प्रमंडल के सहयोग से लाखों पौधों का वृक्षारोपण किया जा चुका है। देवघर स्थित एम्स परिसर में भी व्यापक स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण सुनिश्चित करना है।

किसानों को नई कृषि तकनीकों और आधुनिक खेती के तौर-तरीकों की जानकारी देने के लिए जल्द ही कृषि विशेषज्ञों की एक टीम देवघर पहुंचेगी। इस टीम में सीआरआरआई हजारीबाग के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. निमाई प्रसाद मंडल और डॉ. शिवमंगल प्रसाद शामिल हैं। वहीं आरआरआई कटक, ओडिशा से डॉ. मृदुल चक्रवर्ती भी किसानों को प्रशिक्षण देंगे। विशेषज्ञ किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों के बारे में जानकारी देंगे।

सत्संग आश्रम का मानना है कि कृषि आधारित यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आश्रम प्रबंधन को उम्मीद है कि परमपूज्यपाद श्रीश्रीआचार्यदेव की प्रेरणा से शुरू किए गए ये छोटे-छोटे प्रयास देवघर जिले के हजारों किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे और उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेरेंगे।

