By: Mala Mandal
देवघर नगर निगम क्षेत्र में शनिवार को उस समय अलग तस्वीर देखने को मिली जब नगर निगम के सफाई कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करते हुए शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर कूड़ा और कचरा फैलाया गया। कर्मचारियों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और इसी के तहत उन्होंने विरोध का यह तरीका अपनाया। हालांकि इस प्रदर्शन के तरीके को लेकर शहर में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।

शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर फैले कूड़े को देखकर स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि किसी भी मांग को लेकर आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों को गंदा कर शहर की व्यवस्था प्रभावित करना उचित तरीका नहीं माना जा सकता।
इसी बीच देवघर के मेयर रवि राउत ने एक अलग पहल करते हुए खुद सड़क पर उतरकर सफाई अभियान शुरू कर दिया। सफेद टी-शर्ट पहनकर हाथ में झाड़ू लिए मेयर शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचे और फैले हुए कचरे की सफाई में जुट गए। उनके साथ नगर निगम के कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग भी दिखाई दिए।

मेयर की इस पहल ने शहर में एक सकारात्मक संदेश देने का काम किया। कई लोगों ने इसे जिम्मेदार नेतृत्व का उदाहरण बताया और कहा कि शहर की सफाई केवल नगर निगम या कर्मचारियों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी भी है।
मेयर ने दिया स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश
सफाई अभियान के दौरान मेयर रवि राउत ने कहा कि शहर को साफ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक की भी भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि—
“यह नगर हमारा है। अपने शहर की साफ-सफाई और उसकी गरिमा बनाए रखना शहर के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ आज हम सभी अपने शहर की सफाई के लिए मैदान में उतरे हैं।”मेयर ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर बातचीत हो सकती है, लेकिन विरोध का ऐसा तरीका जिसमें शहर की स्वच्छता और आम लोगों को परेशानी हो, उसे सही नहीं माना जा सकता।

स्थानीय लोगों ने भी दिया साथ
मेयर की पहल के बाद कई स्थानीय नागरिक भी सफाई अभियान में शामिल हो गए। लोगों ने झाड़ू उठाकर चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई की। नागरिकों ने कहा कि शहर को साफ रखना सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी आंदोलन का स्वरूप ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़े। स्थानीय लोगों का कहना था कि देवघर एक धार्मिक और पर्यटन नगरी के रूप में देशभर में पहचान रखता है। ऐसे में शहर की साफ-सफाई और बेहतर छवि बनाए रखना बेहद जरूरी है।

सफाई कर्मचारियों के प्रदर्शन के तरीके पर उठे सवाल
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और उनकी मांगों को लेकर लोगों के बीच सहानुभूति देखने को मिली, लेकिन विरोध के तौर पर शहर में कूड़ा फैलाने के तरीके को लेकर सवाल भी उठे। कई लोगों का मानना था कि मांगों के समाधान के लिए प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संवाद जरूरी है, लेकिन शहर की व्यवस्था को प्रभावित करने से स्थिति और जटिल हो सकती है। दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उचित स्तर पर चर्चा की जाएगी।

जिम्मेदारी और जनभागीदारी का बना उदाहरण
शनिवार की इस घटना के बाद शहर में मेयर की पहल चर्चा का विषय बनी रही। सड़क पर उतरकर सफाई करने की उनकी पहल को कई लोगों ने नेतृत्व और जनभागीदारी का उदाहरण बताया। लोगों का मानना है कि इस तरह के कदम समाज में जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने में मदद करते हैं।

देवघर जैसे धार्मिक महत्व वाले शहर में स्वच्छता को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाते रहे हैं। ऐसे में यह घटना शहर के नागरिकों के लिए भी एक संदेश बनकर सामने आई कि सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

