By: Vikash Kumar Raut (Vicky)3
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर विपक्षी दलों को कमजोर करने और पार्टियों को तोड़ने का आरोप लगाया है। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उसके राजनीतिक इतिहास और दूसरे दलों के साथ उसके संबंधों पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस को ही ‘भस्मासुर’ बताया। रिजिजू का कहना था कि कांग्रेस जिन पार्टियों के संपर्क में आती है, उन्हें खत्म कर देती है। बीजेपी की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है, जब AITC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के फैसले पर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।

क्या है AITC के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद?
दरअसल, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को अंतरिम आदेश में दोनों गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के दौरान ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ वाले मूल चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया। चुनाव आयोग के मुताबिक, उसके सामने AITC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों का मामला आया है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों पर अंतिम निर्णय होने तक मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को रोकने का अंतरिम फैसला लिया गया। आयोग ने दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प भी मांगे।

इसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनावों के लिए अलग-अलग अंतरिम पहचान भी निर्धारित की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया, जबकि अरूप रॉय के गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के फैसले के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बीजेपी और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर पार्टियों को तोड़ते हैं और उसके बाद उनका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और अब ‘पार्टी चोरी’ से जोड़ते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।

हालांकि, राहुल गांधी के ये आरोप राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में यह कहा गया है कि AITC के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के विवाद के कारण पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। आयोग ने इस मामले को चुनाव चिह्न संबंधी नियमों के तहत आगे तय किए जाने की बात कही है।
किरेन रिजिजू का ‘भस्मासुर’ पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस को ‘भस्मासुर’ बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के संपर्क में आने वाली पार्टियां खुद कमजोर या खत्म होती गईं। रिजिजू का यह बयान सीधे तौर पर राहुल गांधी के उस आरोप का जवाब था, जिसमें बीजेपी पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया गया था। बीजेपी का तर्क है कि कांग्रेस को पहले अपने राजनीतिक इतिहास और दूसरे दलों के साथ उसके संबंधों को देखना चाहिए। बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि राजनीतिक दलों के भीतर होने वाले विवादों और टूट के लिए हर बार बीजेपी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। इस पूरे विवाद में बीजेपी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला कर रही है।

आरोपों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका चर्चा में
AITC विवाद ने चुनाव आयोग की भूमिका को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आयोग एक संवैधानिक संस्था है और चुनाव प्रक्रिया के संचालन तथा चुनाव चिह्नों से जुड़े मामलों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, राजनीतिक दलों और चुनाव चिह्नों से संबंधित मामलों के लिए उसके पास निर्धारित प्रक्रियाएं और नियम मौजूद हैं। वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि आयोग के फैसलों से विपक्षी दलों पर असर पड़ रहा है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में AITC के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे को देखते हुए दोनों पक्षों को मूल पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोकने की बात कही गई है।

आगे क्या होगा?
AITC विवाद अब केवल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं रह गया है। इस फैसले का राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ऐसे में आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही और चुनाव आयोग के आगे के फैसले पर नजर रहेगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव को भी तेज कर दिया है। राहुल गांधी जहां चुनाव आयोग के फैसले को विपक्षी दलों के खिलाफ कार्रवाई के व्यापक आरोपों से जोड़ रहे हैं, वहीं बीजेपी नेता इसे कांग्रेस की राजनीतिक शैली और उसके इतिहास से जोड़कर जवाब दे रहे हैं।

फिलहाल AITC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम स्थिति आगे होने वाली कानूनी और चुनावी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी। इस बीच ‘पार्टी चोरी’ और ‘भस्मासुर’ जैसे बयानों ने राजनीतिक बहस को और गर्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी उपचुनावों के मद्देनजर यह विवाद आने वाले दिनों में भी चर्चा में रहने की संभावना है।


