By: Mala Mandal
देवघर। एमएमडीआर कानून के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से शनिवार को राज्यभर में जिला एवं प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में देवघर प्रखंड परिसर में भी झामुमो कार्यकर्ताओं ने धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताया। धरना के दौरान पार्टी नेताओं ने राष्ट्रपति से एमएमडीआर कानून को वापस लेने की मांग की। इस दौरान झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए राज्यहित में कानून वापस लेने की मांग उठाई। धरना कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता प्रखंड परिसर में जुटे। कार्यकर्ताओं ने पार्टी के नेतृत्व में एमएमडीआर कानून के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। नेताओं ने कहा कि यह कानून झारखंड के हितों और राज्य में चल रहे विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है। पार्टी की ओर से केंद्र सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने और झारखंड के हितों को ध्यान में रखते हुए कानून को वापस लेने की मांग की गई।

झारखंड के विकास को प्रभावित करने का आरोप
धरना को संबोधित करते हुए झामुमो जिलाध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एमएमडीआर कानून लागू किए जाने से झारखंड के विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में संचालित विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह कानून लाया गया है। संजय शर्मा ने कहा कि झारखंड सरकार की ओर से समाज के गरीब, जरूरतमंद और असहाय लोगों को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच रहा है और ऐसी स्थिति में राज्य के विकास तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित करने वाला कोई भी कदम चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि झारखंड में मंईयां सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना और अबुआ आवास योजना जैसी योजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों, महिलाओं, किशोरियों और आवास की आवश्यकता वाले लोगों को सहायता उपलब्ध कराना है। झामुमो नेताओं का आरोप है कि एमएमडीआर कानून के कारण राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति और विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
राष्ट्रपति से कानून वापस लेने की मांग
धरना के दौरान झामुमो नेताओं ने राष्ट्रपति से एमएमडीआर कानून को वापस लेने की मांग की। पार्टी नेताओं का कहना था कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यहां के संसाधनों का लाभ राज्य के लोगों के विकास में मिलना चाहिए। नेताओं ने कहा कि राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। झामुमो की ओर से कहा गया कि कानून को लेकर पार्टी अपना विरोध लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज करा रही है। जिला और प्रखंड स्तर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन को इसी आंदोलन का हिस्सा बताया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांग पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक पार्टी इस मुद्दे को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी।

प्रखंड स्तर तक पहुंचा विरोध
पार्टी नेता सुरेश शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आह्वान पर राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एमएमडीआर कानून के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य राज्य के हितों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार और केंद्र तक अपनी बात पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि झामुमो की ओर से फिलहाल लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। यदि इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो पार्टी आगे की रणनीति तैयार करेगी। उन्होंने भविष्य में आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी किए जाने की बात भी कही।

योजनाओं पर असर को लेकर जताई चिंता
झामुमो नेताओं ने कहा कि झारखंड में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए कई सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार की योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों पर किसी भी प्रकार का दबाव पड़ने से योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है। धरना के दौरान नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से महिलाओं, किशोरियों और आवासविहीन परिवारों के लिए संचालित योजनाएं लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी हुई हैं। इसलिए राज्य सरकार के अधिकारों और वित्तीय संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले झारखंड के हितों पर विचार किया जाना चाहिए।

आंदोलन आगे बढ़ाने के संकेत
एमएमडीआर कानून के खिलाफ झामुमो के इस धरना-प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को लेकर राज्य स्तर पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। देवघर प्रखंड परिसर में आयोजित धरना के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। झामुमो नेताओं ने कहा कि पार्टी राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी संघर्ष करती रहेगी। वहीं आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी संबंधी बयान से संकेत मिला कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन का स्वरूप और व्यापक हो सकता है।

फिलहाल देवघर समेत राज्य के विभिन्न जिला और प्रखंड मुख्यालयों पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से झामुमो ने एमएमडीआर कानून को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। पार्टी की मुख्य मांग है कि राष्ट्रपति राज्यहित में इस कानून को वापस लेने की दिशा में पहल करें। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नजर बनी हुई है।



