By: Mala Mandal
देवघर। साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस की लगातार जारी कार्रवाई के तहत साइबर थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में 10 संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार लोगों के पास से 15 मोबाइल फोन, 18 सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद किया गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्धों द्वारा अलग-अलग तरीके अपनाकर आम लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया जा रहा था। देवघर पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक के आदेश के तहत जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में साइबर थाना पुलिस की टीम ने 18 सितंबर 2026 को कार्रवाई करते हुए 10 संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, गुप्त सूचना मिली थी कि देवघर जिले के पथरड्डा ओपी क्षेत्र से संबंधित कुछ संदिग्ध लोग साइबर ठगी की गतिविधियों में शामिल हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और संदिग्धों को हिरासत में लिया। जांच के दौरान इनके पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड सहित अन्य सामान बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच की जा रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क करने और किस तरह की साइबर ठगी के लिए किया जाता था।

कस्टमर केयर के नाम पर ठगी का तरीका
पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार संदिग्धों द्वारा साइबर ठगी के लिए अलग-अलग कंपनियों और सेवाओं के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क किया जाता था। इसमें PhonePe, Paytm और अन्य डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को झांसे में लेने का तरीका शामिल बताया गया है। इसके अलावा Flipkart कस्टमर केयर के नाम पर भी लोगों से संपर्क करने और उन्हें विश्वास में लेकर ठगी करने का प्रयास किया जाता था। साइबर अपराधी ग्राहक सेवा से जुड़ी समस्या का समाधान करने के नाम पर लोगों से बातचीत करते थे और इसके बाद उनके मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते थे। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी खुद को किसी प्रतिष्ठित कंपनी या डिजिटल सेवा का प्रतिनिधि बताकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। इसके बाद पीड़ित को किसी लिंक पर क्लिक करने, मोबाइल में कोई प्रक्रिया पूरी करने या बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा करने के लिए कहा जा सकता है।

फर्जी Airtel Payment Bank के नाम पर भी ठगी
पुलिस की जांच में साइबर ठगी का एक अन्य तरीका भी सामने आया है। संदिग्धों पर आरोप है कि वे फर्जी Airtel Payment Bank अधिकारी बनकर लोगों को झांसे में लेने का प्रयास करते थे। पुलिस के मुताबिक, इसके लिए Airtel Thanks ऐप से संबंधित जानकारी या अन्य डिजिटल सेवाओं का हवाला दिया जाता था। इसके बाद लोगों को Airtel Payment Bank का फर्जी बंद बैंक अकाउंट चालू कराने के नाम पर फंसाने की कोशिश की जाती थी। ऐसे मामलों में साइबर अपराधी लोगों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास करते हैं कि उनका बैंक अकाउंट, भुगतान सेवा या डिजिटल सुविधा बंद हो गई है। इसके बाद खाते को दोबारा चालू करने के नाम पर उनसे जानकारी या पैसे हासिल करने की कोशिश की जाती है।

बिल, KYC और RTO चालान के नाम पर भी ठगी
प्रेस नोट के अनुसार, साइबर ठगी के लिए KYC अपडेट, मोबाइल बिल, बिजली बिल और RTO चालान जैसे अलग-अलग बहाने भी इस्तेमाल किए जाते थे। ऐसे तरीकों में लोगों को किसी जरूरी सेवा या दस्तावेज से जुड़ी समस्या बताकर तत्काल कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाया जाता है। साइबर अपराधी अक्सर लोगों को डर या जल्दबाजी की स्थिति में डालने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के लिए, मोबाइल कनेक्शन बंद होने, बैंक खाता बंद होने, KYC अपडेट नहीं होने या किसी चालान के लंबित होने की बात कहकर लोगों को ठगी के जाल में फंसाया जा सकता है।

15 मोबाइल और 18 सिम कार्ड बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए संदिग्धों के पास से 15 मोबाइल फोन, 18 सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, तकनीकी जांच के दौरान जब्त मोबाइल और सिम कार्ड से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस ने यह भी बताया कि तकनीकी जांच के आधार पर गिरफ्तार संदिग्धों के पास से जब्त मोबाइल नंबर एवं सिम कार्ड के खिलाफ विभिन्न थानों में शिकायत दर्ज पाए गए हैं। इससे पुलिस को साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच जारी
देवघर पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरफ्तार संदिग्धों का साइबर ठगी के किसी बड़े नेटवर्क से संबंध है या नहीं। पुलिस मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच के साथ-साथ संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोगों से भी अपील की गई है कि किसी अनजान व्यक्ति के फोन पर बैंक खाता, एटीएम, OTP, UPI PIN, KYC या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करें।

किसी कंपनी या बैंक के कस्टमर केयर अधिकारी के नाम पर फोन आने पर भी पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मोबाइल पर किसी लिंक को खोलने, स्क्रीन शेयर करने या किसी ऐप के माध्यम से बैंकिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहता है तो सावधानी बरतना जरूरी है।

देवघर पुलिस की कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जांच पूरी होने के बाद साइबर ठगी से जुड़े अन्य मामलों और संभावित संपर्कों के बारे में भी जानकारी सामने आ सकती है।

