By: Mala Mandal
मोहनपुर (देवघर)। घटवाल-घटवार आदिवासी समाज की ओर से शनिवार को त्रिकूट पहाड़ स्थित तिरनगर मैदान में आदिम जनजाति सांस्कृतिक करम परब महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया। करम गोसाईं, करमा परब और जावा गोसाईं की पारंपरिक मान्यताओं एवं लोक संस्कृति को समर्पित इस महोत्सव में समाज के सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान पारंपरिक पूजा-अर्चना, लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से समाज की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।

महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करम पूजा से हुई। समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से करम पर्व की परंपराओं का निर्वहन किया। पूजा के दौरान पारंपरिक मान्यताओं और धार्मिक आस्थाओं के अनुसार करम गोसाईं एवं जावा गोसाईं की पूजा की गई। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाने का संकल्प भी व्यक्त किया।
पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं और युवतियों ने प्रस्तुत किया लोकनृत्य
आदिम जनजाति सांस्कृतिक करम परब महोत्सव का सबसे आकर्षक पक्ष महिलाओं और युवतियों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और युवतियों ने लोकगीतों की प्रस्तुति दी। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर प्रस्तुत लोकनृत्य ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से समाज की लोक संस्कृति और जीवनशैली की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। पूरे तिरनगर मैदान में करम पर्व की उमंग और उल्लास दिखाई दिया।

बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने लिया हिस्सा
महोत्सव में माताएं, बहनें, बेटियां, युवा और बुद्धिजीवी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से पर्व की परंपराओं का पालन किया। आयोजन के माध्यम से सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि घटवाल-घटवार समाज की ओर से पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सामूहिक रूप से करम परब महोत्सव का आयोजन किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज, लोकगीत, लोकनृत्य और धार्मिक मान्यताओं को संरक्षित करना है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जोड़ना भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने पर जोर
आयोजकों ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिक जीवनशैली के बीच अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक पूजा-पद्धति और सामाजिक रीति-रिवाज किसी भी समुदाय की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। यदि इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक नहीं पहुंचाया गया तो धीरे-धीरे इनके विलुप्त होने का खतरा बना रह सकता है। इसी उद्देश्य से करम परब महोत्सव 2026 को सामूहिक रूप से आयोजित किया गया, ताकि समाज के बच्चे और युवा अपनी संस्कृति को करीब से समझ सकें। आयोजन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। बुजुर्गों और समाज के अनुभवी लोगों ने नई पीढ़ी को परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं से अवगत कराया।

करम पर्व सामाजिक एकता का भी प्रतीक
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि करम पर्व केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक है। पर्व के दौरान समाज के लोग एक स्थान पर एकत्र होकर पूजा-अर्चना करते हैं और पारंपरिक गीत-संगीत तथा नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करते हैं। त्रिकूट पहाड़, देवघर की प्राकृतिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस महोत्सव ने आयोजन को और भी खास बना दिया। तिरनगर मैदान में सुबह से ही समाज के लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक उत्साह के साथ लोग जुटे और पूरे आयोजन के दौरान उल्लास का माहौल बना रहा।

ये लोग रहे मौजूद
महोत्सव में खुशवंत प्रधान, महेंद्र सिंह, शैलेश राय, राजू सिंह, हेम नारायण सिंह, बलवंत सिंह, वनवारी प्रधान, विरेन्द्र सिंह, अनिल सिंह, मुकेश कुमार राय, चुन्ना सिंह, चंदन राय, कुलवंत सिंह, अजय बाबा, तीर्थनाथ, देव नारायण सिंह, सुघरी सिंह, भीम सिंह, पल्टू राय, प्रकाश राय, मृतुंजय राय, भूपाल सिंह, संजय सिंह, रोहित राय, नागेंद्र राय, शालिग्राम सिंह, टिपन राय, रघुनाथ राय, मनोज राय, नरेंद्र राय, भोला राय, शिव शंकर, विजय, पंकज कुमार, नीतीश कुमार राय, कालेश्वर सिंह, अनिल राय, विकास राय, विजय सिंह, किशन सिंह, जानकी देवी, रंजीत राय, दुर्गा सिंह, देवनारायण राय एवं अजय कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

आयोजन के अंत में समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने पर जोर दिया। घटवाल-घटवार समाज का आदिम जनजाति सांस्कृतिक करम परब महोत्सव 2026 पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक एकता और लोक विरासत के संरक्षण का संदेश देते हुए संपन्न हुआ।



