By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देवघर, 30 मई 2026। जिले की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी प्रखंडों की शैक्षणिक गतिविधियों, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति, विद्यालयों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, मध्याह्न भोजन योजना तथा स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रखंडवार समीक्षा में कई विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम पाए जाने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जाहिर की और स्थिति में तत्काल सुधार लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, विद्यालय प्रबंधन समिति तथा शिक्षकों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कम उपस्थिति वाले विद्यालयों की पहचान कर विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित करते हुए बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब छात्र नियमित रूप से विद्यालय पहुंचें।
बैठक में जिले के मैट्रिक परीक्षा परिणामों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने परीक्षा परिणामों का विश्लेषण करते हुए बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों की सराहना की, वहीं अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन वाले विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए नियमित मूल्यांकन, अतिरिक्त कक्षाएं तथा विषयवार शैक्षणिक सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इसके अलावा विद्यालयों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने स्कूल भवन, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, बिजली, फर्नीचर तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की स्थिति की जानकारी ली। समीक्षा के दौरान जहां भी कमियां सामने आईं, उन्हें तत्काल दूर करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
मध्याह्न भोजन योजना को लेकर भी उपायुक्त ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह योजना बच्चों के पोषण एवं विद्यालय में उनकी उपस्थिति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए योजना का संचालन पूरी पारदर्शिता और नियमितता के साथ होना चाहिए। बैठक में जानकारी दी गई कि कई विद्यालयों में रसोइयों के पद रिक्त हैं। इस पर उपायुक्त ने नियमानुसार जल्द से जल्द रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया ताकि भोजन व्यवस्था प्रभावित न हो।

इसके साथ ही उन्होंने सभी विद्यालयों में समय पर चावल का उठाव सुनिश्चित करने की हिदायत दी। उपायुक्त ने कहा कि खाद्यान्न की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी विद्यालय में चावल या अन्य आवश्यक सामग्री की कमी पाई जाती है तो संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य से भी जुड़ा रहा। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ विद्यार्थी ही बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं, इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

इस दिशा में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के साथ समन्वय स्थापित कर एक व्यवस्थित रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया। रोस्टर के अनुसार विद्यालयों में नियमित मेडिकल कैंप आयोजित कर प्रत्येक छात्र-छात्रा की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। जांच के दौरान यदि किसी बच्चे में स्वास्थ्य संबंधी समस्या पाई जाती है तो उसका समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों के समग्र विकास की दिशा में कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और इसकी प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी तथा शिक्षा विभाग एवं प्रशासन के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीरता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगा।

