By: Mala Mandal
देवघर/रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए संकट में फंसे एक परिवार की तत्काल मदद के निर्देश दिए हैं। देवघर जिले की एक बेबस मां की गुहार मुख्यमंत्री तक पहुंची, जिसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बिना देरी किए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया। इस पहल से न केवल पीड़ित परिवार को राहत की उम्मीद जगी है, बल्कि आम लोगों में भी सरकार के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है।

जानकारी के अनुसार, देवघर जिले की एक महिला के पति का कुछ समय पहले निधन हो गया। पति की असमय मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। महिला पर ढाई साल के जुड़वां बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक तंगी, रोजगार का अभाव और छोटे बच्चों की देखभाल की मजबूरी ने परिवार को बेहद कठिन परिस्थितियों में ला खड़ा किया।

बताया जा रहा है कि महिला ने अपनी व्यथा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का प्रयास किया। आखिरकार उसकी गुहार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति का तत्काल आकलन किया जाए तथा विधवा महिला को सरकार की सभी पात्र योजनाओं से जोड़ा जाए। साथ ही बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक सहायता भी सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया कि परिवार को सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन, आवास, स्वास्थ्य सुविधा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भी सहायता देने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया।

स्थानीय प्रशासन ने मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के बाद मामले पर कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। प्रशासन का कहना है कि सभी पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द परिवार तक पहुंचाया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा किया है कि समाज में ऐसे कई परिवार हैं जो अचानक किसी दुर्घटना या बीमारी के कारण आर्थिक संकट में आ जाते हैं। समय पर सरकारी सहायता मिलने से ऐसे परिवारों को नई उम्मीद मिल सकती है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधवा महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए सरकार की कई योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन सही समय पर जानकारी और प्रशासनिक सहयोग मिलना भी उतना ही जरूरी है। यदि जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे तो उनका जीवन काफी हद तक आसान हो सकता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस त्वरित पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जरूरतमंद नागरिकों के साथ खड़ा होना है और इस मामले में मुख्यमंत्री का तत्काल हस्तक्षेप राहत देने वाला कदम साबित हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को ऐसे मामलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए, ताकि किसी भी असहाय परिवार को सरकारी सहायता के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित करना भी बेहद आवश्यक है।

फिलहाल पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद उन्हें जल्द राहत मिलेगी और ढाई साल के जुड़वां बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रशासनिक कार्रवाई पूरी होने के बाद परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की संभावना है।


