By: Vikash, Mala Mandal
देवघर के जयपुर मोड़ लूटकांड में इस्तेमाल वाहन की पहचान पर सस्पेंस, चेसिस नंबर और दस्तावेजों में गड़बड़ी से जांच तेज
देवघर जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत जयपुर मोड़ के पास हुए चर्चित लूटकांड की जांच में पुलिस को एक बड़ा सुराग मिला है, लेकिन साथ ही यह मामला और भी उलझता जा रहा है। घटना में इस्तेमाल की गई सफेद रंग की फॉर्च्यूनर गाड़ी पर लगी नंबर प्लेट फर्जी पाई गई है, जिससे पुलिस की जांच नई दिशा में बढ़ गई है।

घटना गुरुवार रात की है, जब रांची निवासी एक मेडिकल चालक के साथ लूटपाट की घटना को अंजाम दिया गया था। इस दौरान अपराधियों के बीच आपसी फायरिंग में गिरोह के ही एक सदस्य रंजन लाल की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अब वाहन से जुड़े खुलासों ने पूरे केस को और जटिल बना दिया है।
पुलिस द्वारा घटनास्थल से जब्त की गई फॉर्च्यूनर गाड़ी की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि गाड़ी पर लगी नंबर प्लेट और वाहन के वास्तविक चेसिस नंबर में मेल नहीं है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब्त गाड़ी के नंबर के आधार पर जांच करने पर पता चला कि यह वाहन मध्य प्रदेश में पंजीकृत है। हालांकि, जब चेसिस नंबर और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई तो उनमें विसंगति पाई गई। इससे संदेह और गहरा गया है कि वाहन की पहचान जानबूझकर छिपाई गई है।
जांच टीम अब चेसिस नंबर के आधार पर वाहन के वास्तविक मालिक और उसके ट्रांसफर इतिहास की जानकारी जुटाने में लगी हुई है। इसके लिए जिला परिवहन कार्यालय से रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और ट्रांसफर हिस्ट्री मांगी गई है। पुलिस का मानना है कि इस गाड़ी के जरिए पूरे गिरोह और उसके नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता है।

इसके अलावा, गाड़ी के अंदर से बरामद हेलमेट और अन्य सामान की भी जांच की जा रही है। पुलिस इन सामानों पर मिले फिंगरप्रिंट्स के जरिए आरोपियों की पहचान और उनके नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस को शक है कि यह गिरोह संगठित तरीके से विभिन्न राज्यों में अपराधों को अंजाम देता रहा है। फर्जी नंबर प्लेट और चोरी या फर्जी दस्तावेजों पर आधारित वाहनों का इस्तेमाल इनके काम करने का तरीका हो सकता है।

घटनास्थल से पुलिस ने एक देसी पिस्टल, मैगजीन, जिंदा कारतूस, खोखा, बिना नंबर की बाइक और उक्त फॉर्च्यूनर वाहन जब्त किया है। इन सभी साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे घटना की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के इस चरण में वाहन सबसे अहम कड़ी बनकर उभरा है। अगर वाहन के असली मालिक और उसकी खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड सामने आ जाता है, तो गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वाहन और बाइक हाल ही में खरीदे गए थे और इन्हें विशेष रूप से इस वारदात को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया गया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अपराध पूर्व नियोजित था और इसमें कई लोगों की भूमिका रही है।
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगालने में भी जुटी है, ताकि घटना से पहले और बाद में वाहन की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही तकनीकी जांच के जरिए मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

देवघर पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर लिया जाएगा।
यह मामला न केवल एक लूटकांड तक सीमित रह गया है, बल्कि अब यह संगठित अपराध और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क की ओर भी इशारा कर रहा है। पुलिस के सामने चुनौती यह है कि वह इस जटिल जाल को सुलझाकर अपराधियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाए।

