By: Mala Mandal
देवघर: सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाना होता है, लेकिन कई बार सिस्टम की तकनीकी खामियां और विभागीय समन्वय की कमी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। ऐसा ही एक मामला देवघर जिले के सारठ क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक विधवा महिला अपने पेंशन भुगतान को लेकर लंबे समय से परेशान है। हैरानी की बात यह है कि महिला का सक्रिय बैंक खाता सेंट्रल बैंक में है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में पेंशन किसी दूसरे बैंक खाते में भेजी जा रही है।

मामले को सामने लाने वाले व्यक्ति ने बताया कि महिला के पति ने अपने निधन से लगभग 20 दिन पहले पेंशन प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उनसे संपर्क किया था। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कर आवेदन ऑनलाइन जमा कर दिया था। उस समय यह उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद महिला को नियमित रूप से पेंशन का लाभ मिलने लगेगा।
लेकिन कुछ समय बाद जब पेंशन की राशि खाते में नहीं पहुंची तो मामले की जानकारी लेने के लिए संबंधित विभाग से संपर्क किया गया। जांच के दौरान जो जानकारी सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया।

बताया गया कि महिला के नाम से जारी पेंशन राशि उस बैंक खाते में नहीं जा रही थी जो महिला इस्तेमाल कर रही थी, बल्कि भुगतान रिकॉर्ड में राशि ग्रामीण बैंक सारठ के खाते में ट्रांसफर दिखाई दे रही थी।
इसके बाद महिला को लेकर संबंधित बैंक शाखा पहुंचा गया। वहां बैंक कैशियर से जानकारी ली गई तो शुरुआती जांच में बताया गया कि महिला के नाम से बैंक में कोई खाता उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी मिलने के बाद महिला और उसके सहयोगी और अधिक असमंजस में पड़ गए।

इसके बाद पूरे मामले को समझने के लिए पेंशन विभाग कार्यालय पहुंचकर पोर्टल के माध्यम से बैंक विवरण की जांच की गई। पोर्टल में दर्ज जानकारी के अनुसार पेंशन भुगतान के लिए जो बैंक खाता दिख रहा था, वह वास्तव में ग्रामीण बैंक सारठ से जुड़ा हुआ था।
इस खुलासे के बाद महिला को दोबारा संबंधित बैंक ले जाया गया। वहां एकाउंटेंट स्तर पर रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में सामने आया कि महिला के नाम से बैंक में खाता मौजूद है। इसके बाद बैंक प्रबंधन द्वारा खाता खोलने से संबंधित दस्तावेज और ओपनिंग फॉर्म निकलवाया गया।

जानकारी के अनुसार बैंक प्रबंधन ने आगे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ दिनों बाद आने को कहा। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि महिला को अपने खाते की जानकारी नहीं थी और प्रारंभिक स्तर पर बैंक भी खाते की पुष्टि नहीं कर पाया, तो आखिर पेंशन भुगतान किस आधार पर उस खाते में भेजा जा रहा था? क्या आवेदन प्रक्रिया के दौरान बैंक विवरण में कोई त्रुटि हुई या फिर डेटा अपडेट के दौरान कोई तकनीकी गड़बड़ी सामने आई?

इस मामले ने उन हजारों लाभुकों की चिंता भी बढ़ा दी है जो सरकारी योजनाओं के तहत पेंशन प्राप्त करते हैं और जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों की होती है। कई लाभार्थी डिजिटल प्रक्रिया और बैंकिंग सिस्टम की जटिलताओं को समझ नहीं पाते, जिससे छोटी तकनीकी त्रुटियां भी बड़ी परेशानी में बदल जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में विभाग और बैंक के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए ताकि लाभार्थियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। विशेष रूप से वृद्ध, विधवा और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए एक सरल सत्यापन व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है।

महिला के पति की मृत्यु के बाद परिवार पहले से आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। ऐसे समय में पेंशन जैसी सहायता राशि का समय पर नहीं मिलना परिवार की स्थिति को और कठिन बना देता है।
यह मामला प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए भी एक संकेत है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सिर्फ स्वीकृति देना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि राशि सही व्यक्ति और सही खाते तक पहुंचे।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और महिला को उसका अधिकार कब तक मिल पाता है। साथ ही यह भी जरूरी होगा कि अन्य लाभार्थियों के रिकॉर्ड की भी समय-समय पर जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

