By: Vikash, Mala Mandal
भारतीय रेल के इतिहास में 16 अप्रैल का दिन एक विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1853 में जब पहली ट्रेन बोरी बंदर से ठाणे तक चली थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह यात्रा एक दिन दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक का रूप ले लेगी। इसी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देते हुए पूर्व रेलवे ने भारतीय रेल के 173वें स्थापना दिवस को एक नई सोच और संकल्प के साथ मनाया।

इस बार पूर्व रेलवे ने पारंपरिक आयोजनों से हटकर इस ऐतिहासिक दिन को स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह पहल केवल एक दिन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक महीने तक चलने वाले व्यापक स्वच्छता अभियान के रूप में लागू किया गया, जिसका चरम बिंदु 16 अप्रैल को देखा गया।

इस विशेष दिन पर रेलवे के सभी स्टेशनों, कोचों और ट्रैक पर विशेष सफाई अभियान चलाया गया। कर्मचारियों ने मिलकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि भारत की गौरवशाली रेल विरासत को सहेजने का सबसे अच्छा तरीका है उसे स्वच्छ और टिकाऊ बनाए रखना।
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने इस अवसर पर कहा कि, “जिस दिन भारत में पहली बार ट्रेन चली थी, वह दिन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज हम उस विरासत का सम्मान करते हुए अपने यात्रियों को बेहतर और स्वच्छ यात्रा अनुभव देने का संकल्प लेते हैं।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें यात्रियों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के तहत महाप्रबंधक ने हावड़ा स्टेशन का दौरा किया, जहां उन्होंने यात्रियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने यात्रियों से उनकी यात्रा से जुड़ी प्रतिक्रिया ली और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यात्रियों को रेलवे ट्रैक पर कूड़ा न फेंकने, डिब्बों में गंदगी न फैलाने और उपलब्ध कूड़ेदानों का उपयोग करने की सलाह दी।

यात्रियों को यह भी बताया गया कि ट्रेन में उपलब्ध ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) का उपयोग कर वे आसानी से कचरा निपटा सकते हैं। इसके साथ ही, बायो-टॉयलेट के सही उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वॉशरूम में कूड़ा फेंकने से सिस्टम खराब हो सकता है, इसलिए केवल निर्धारित डस्टबिन का ही उपयोग करें।
इस अभियान की खास बात यह रही कि यह केवल उच्च अधिकारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेलवे के हर स्तर के कर्मचारी इसमें शामिल हुए। मंडल रेल प्रबंधक, विभागाध्यक्ष, शाखा अधिकारी और अन्य कर्मचारियों ने भी विभिन्न स्टेशनों पर जाकर लोगों से संवाद किया।

पूर्व रेलवे के विभिन्न प्रमुख स्टेशनों जैसे सियालदह, हावड़ा, मालदा और आसनसोल में इस अभियान का व्यापक असर देखने को मिला। हजारों यात्रियों तक स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश पहुंचाया गया।
इस अभियान को सफल बनाने में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वयंसेवकों ने रेलवे सुरक्षा बल और अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर स्टेशनों और ट्रेनों में सफाई कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी उपस्थिति ने इस अभियान को जन आंदोलन का रूप देने में मदद की।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने इस अवसर पर कहा कि स्वच्छ रेलवे बनाए रखना किसी एक दिन का कार्य नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि रेलवे प्रशासन पूरी तरह से इस दिशा में काम कर रहा है, लेकिन जब तक यात्री इसमें सहयोग नहीं करेंगे, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं है।
उन्होंने यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि वे स्वच्छता को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझें और अपने आसपास सफाई बनाए रखें। जब रेलवे और यात्री मिलकर काम करेंगे, तब ही एक स्वच्छ और सुरक्षित यात्रा अनुभव संभव हो पाएगा।

यह पहल केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत भी है। पूर्व रेलवे का यह प्रयास दर्शाता है कि किस तरह एक ऐतिहासिक अवसर को जन जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन के मंच में बदला जा सकता है।
173 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के बाद अब भारतीय रेल एक नए युग की ओर बढ़ रही है, जहां स्वच्छता, सतत विकास और यात्री सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। पूर्व रेलवे का यह अभियान न केवल अन्य रेलवे जोनों के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

अंततः यह कहा जा सकता है कि स्वच्छ रेलवे केवल सरकारी पहल से संभव नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि हर यात्री अपने स्तर पर थोड़ी-सी जागरूकता और जिम्मेदारी दिखाए, तो भारतीय रेल का यह विशाल नेटवर्क वास्तव में एक स्वच्छ, सुरक्षित और आदर्श यात्रा प्रणाली बन सकता है।
