By: Mala Mandal
डिजिटल युग में ऑनलाइन शॉपिंग और मोबाइल बैंकिंग की बढ़ती सुविधाओं के साथ साइबर ठगी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामले में पुलिस ने दो ऐसे कथित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो फ्लिपकार्ट और अमेजन के कस्टमर केयर प्रतिनिधि तथा एयरटेल पेमेंट बैंक के अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करते थे। आरोप है कि दोनों आरोपी ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते थे और बाद में उनकी निजी एवं बैंकिंग संबंधी जानकारी का दुरुपयोग करते थे।

पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब आम लोगों की जरूरतों और उनकी डिजिटल निर्भरता का फायदा उठाकर ठगी की नई-नई तरकीबें अपना रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग, रिफंड, ऑर्डर कैंसिलेशन, खाते से पैसे कटने, केवाईसी अपडेट और बैंक खाते से संबंधित समस्याओं को साइबर ठगी का माध्यम बनाया जा रहा है।
कस्टमर केयर अधिकारी बनकर जीतते थे लोगों का भरोसा
आरोप है कि गिरफ्तार किए गए दोनों साइबर अपराधी खुद को प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियों फ्लिपकार्ट और अमेजन का कस्टमर केयर अधिकारी बताते थे। ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को कई बार ऑर्डर की डिलीवरी, भुगतान, रिफंड या सामान वापस करने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ग्राहक समाधान के लिए कस्टमर केयर से संपर्क करना चाहते हैं। साइबर अपराधी इसी स्थिति का फायदा उठाकर लोगों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। आरोपी कथित तौर पर ग्राहकों को भरोसा दिलाते थे कि उनकी समस्या का जल्द समाधान कर दिया जाएगा। इसके बाद रिफंड दिलाने, भुगतान वापस करने या खाते से जुड़ी समस्या दूर करने के नाम पर उनसे आवश्यक से अधिक जानकारी मांगी जाती थी। कई साइबर ठगी के मामलों में अपराधी पीड़ित से ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, कार्ड विवरण या अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। आम लोगों को यह समझना जरूरी है कि किसी भी बैंक, डिजिटल पेमेंट सेवा या प्रतिष्ठित कंपनी के अधिकृत कर्मचारी सामान्य परिस्थितियों में ग्राहक से फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड साझा करने के लिए नहीं कहते हैं।

एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी बनकर भी करते थे संपर्क
पुलिस के अनुसार आरोपियों द्वारा एयरटेल पेमेंट बैंक के अधिकारी या कर्मचारी बनकर भी लोगों को निशाना बनाया जाता था। डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल आधारित भुगतान सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बड़ी संख्या में लोग अब मोबाइल फोन के माध्यम से बैंकिंग और लेनदेन करते हैं। साइबर अपराधी बैंक अधिकारी बनकर ग्राहकों को केवाईसी अपडेट, खाता बंद होने, खाते पर रोक लगने, बैंकिंग सेवा बंद होने या तकनीकी समस्या का डर दिखाकर अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं।

कई बार पीड़ित को यह कहा जाता है कि यदि उसने तुरंत प्रक्रिया पूरी नहीं की तो उसका बैंक खाता बंद हो जाएगा या वह बैंकिंग सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाएगा। ऐसी स्थिति में घबराकर लोग बिना जांच किए अपराधियों के बताए निर्देशों का पालन कर देते हैं। साइबर ठग इसी डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। फोन पर बातचीत के दौरान वे खुद को पूरी तरह बैंक या कंपनी का अधिकारी दिखाने की कोशिश करते हैं, ताकि पीड़ित को किसी प्रकार का संदेह न हो।

ऑनलाइन रिफंड के नाम पर भी होती है ठगी
ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान रिफंड से जुड़ी समस्या भी साइबर ठगों के लिए एक बड़ा माध्यम बन गई है। ग्राहक को बताया जाता है कि उसका पैसा वापस किया जा रहा है। इसके लिए उसे एक लिंक भेजा जा सकता है या किसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कहा जा सकता है। साइबर अपराधी कई बार रिफंड भेजने के बजाय पीड़ित को ऐसी प्रक्रिया में फंसा देते हैं, जिससे उसके बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से पैसे निकल सकते हैं। इसलिए किसी भी रिफंड के नाम पर ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। ग्राहकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने की आवश्यकता नहीं होती। यूपीआई पिन का उपयोग सामान्य रूप से पैसे भेजने या भुगतान को अधिकृत करने के लिए किया जाता है।

फर्जी नंबर और लिंक से भी हो सकती है ठगी
साइबर अपराधी इंटरनेट पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालकर भी लोगों को निशाना बना सकते हैं। ग्राहक कई बार किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर सर्च करते हैं और सबसे पहले दिखाई देने वाले नंबर पर कॉल कर देते हैं। इसी लापरवाही का फायदा साइबर ठग उठा सकते हैं। इसलिए फ्लिपकार्ट, अमेजन, बैंक या किसी भी डिजिटल पेमेंट कंपनी से संपर्क करने के लिए केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करना चाहिए। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करने से भी बचना चाहिए। फर्जी लिंक के माध्यम से लोगों से बैंकिंग जानकारी भरवाई जा सकती है या उनके मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है।

स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन से रहें सावधान
साइबर ठगी के मामलों में कई बार अपराधी मोबाइल स्क्रीन शेयर करने के लिए कहते हैं। वे तकनीकी सहायता देने, बैंकिंग समस्या दूर करने या रिफंड प्रक्रिया पूरी कराने का बहाना बनाकर पीड़ित को स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित के मोबाइल पर दिखाई देने वाली संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन डाउनलोड करने या मोबाइल स्क्रीन साझा करने से बचना चाहिए।

साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें सावधानी
साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को सबसे पहले अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी नंबर और नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक या कंपनी का अधिकारी बताता है, तो पहले उसकी पहचान की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें। ग्राहकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए जल्दबाजी में निर्णय न लें। साइबर अपराधी अक्सर डर, दबाव और तत्काल कार्रवाई की बात कहकर लोगों को सोचने का समय नहीं देते।

दो आरोपियों की गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा
फ्लिपकार्ट-अमेजन के कस्टमर केयर प्रतिनिधि और एयरटेल पेमेंट बैंक अधिकारी बनकर कथित तौर पर ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी को साइबर अपराध के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। साइबर अपराध के मामलों में पुलिस और जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास करती हैं। डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आम लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना होगा। किसी कॉल, मैसेज या लिंक पर आंख बंद कर भरोसा करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।

दो साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया है। ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल भुगतान सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी सावधानी बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। जागरूकता और सतर्कता ही साइबर ठगी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।
