By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी में अपने दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। रावत का यह फैसला उनके करीबी सहयोगी और पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई के एक दिन बाद सामने आया है। रावत ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष पर किसी तरह का सवाल खड़ा हो।

ED की कार्रवाई के बाद आया इस्तीफा
दरअसल, ED ने उत्तराखंड में 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी यानी VPDO भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर कार्रवाई की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक तलाशी के दौरान करीब 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, सोना, महंगी घड़ियां और अन्य कीमती सामान बरामद किए गए। जीना पहले हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनके OSD के रूप में काम कर चुके हैं और वर्तमान में उनके निजी सहायक के तौर पर जुड़े हुए हैं।

ED की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बहस पहले से ही तेज है। यही वजह है कि चंदन सिंह जीना से जुड़ी कार्रवाई का राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है। हालांकि, जांच एजेंसी की कार्रवाई और बरामदगी अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

किन पदों से हटे हरीश रावत?
हरीश रावत ने कांग्रेस के उत्तराखंड प्रदेश संगठन की कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC में स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। रावत ने अपने फैसले को पार्टी की राजनीतिक लड़ाई और उसकी छवि से जोड़ते हुए कहा कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को किसी तरह की कमजोरी नहीं आनी चाहिए। रावत का कहना है कि चंदन सिंह जीना के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी। उन्होंने अपने सहयोगी का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें लगाए गए आरोपों पर विश्वास नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी या OMR शीट से छेड़छाड़ से जुड़े आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह उनके लिए शर्मिंदगी की बात होगी।

हरीश रावत ने क्या कहा?
हरीश रावत ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि इस पूरी कार्रवाई को चुनावी राजनीति के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले एक नया राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की जा रही है। रावत ने कहा कि अगर किसी मामले में उनकी भूमिका या जिम्मेदारी सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में हुई सरकारी भर्तियों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, उनकी सरकार के दौरान युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार रावत ने अपने कार्यकाल में 42 हजार से अधिक भर्तियों का जिक्र किया और कहा कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित किसी भी गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे प्रमुख और अनुभवी नेताओं में शामिल रहे हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में उनके पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से हटने का फैसला कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। एक तरफ रावत इसे पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई को कमजोर होने से बचाने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस घटनाक्रम को कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। खास तौर पर उत्तराखंड की राजनीति में भर्ती और सरकारी नियुक्तियों से जुड़े मुद्दे पहले से संवेदनशील रहे हैं। कांग्रेस के सामने अब चुनौती यह होगी कि वह इस पूरे मामले को किस तरह राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर संभालती है। पार्टी के लिए यह जरूरी होगा कि वह जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उससे जुड़े आरोपों पर अपना स्पष्ट रुख रखे, साथ ही अपने वरिष्ठ नेता के इस्तीफे से पैदा हुए राजनीतिक संदेश का भी सामना करे।

क्या हरीश रावत की राजनीतिक भूमिका खत्म हो गई?
हरीश रावत के पदों से इस्तीफा देने का अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक पदों से हटने की घोषणा की है। उनका कहना है कि वह कांग्रेस की लड़ाई को कमजोर नहीं करना चाहते। रावत ने यह भी संकेत दिया है कि वह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। इसलिए इसे फिलहाल कांग्रेस छोड़ने के फैसले के बजाय संगठनात्मक पदों से दूरी बनाने के रूप में देखा जा सकता है।

आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर ED की जांच और चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले की आगे की कार्रवाई पर रहेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्य यह तय करेंगे कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है। हरीश रावत के इस्तीफे ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर और राज्य की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। एक ओर रावत इसे पार्टी की छवि बचाने और भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को मजबूत रखने का कदम बता रहे हैं, तो दूसरी ओर उनके राजनीतिक विरोधी इसे कांग्रेस के लिए बड़ी असहज स्थिति के तौर पर देख सकते हैं।
कुल मिलाकर, ED की कार्रवाई के बाद हरीश रावत का कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और इस पूरे मामले का आगामी उत्तराखंड की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

