By: Mala Mandal
देवघर/जमुनिया। हूल दिवस के अवसर पर जमुनिया स्थित वीर सिद्धो-कान्हो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए तथा उनके संघर्ष, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को स्मरण किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने 1855 के ऐतिहासिक हूल आंदोलन को भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को याद किया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हूल आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ एक सामान्य विद्रोह नहीं था, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन के अधिकार, सामाजिक सम्मान, स्वाभिमान और जनजातीय अस्मिता की रक्षा के लिए लड़ा गया एक ऐतिहासिक जनआंदोलन था। वीर सिद्धो और कान्हो ने अपने साहस, संगठन क्षमता और नेतृत्व से उस दौर में अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष का ऐसा संदेश दिया, जिसने आगे चलकर देश के स्वतंत्रता आंदोलन को भी नई दिशा प्रदान की।

हूल दिवस के अवसर पर प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण के बाद उपस्थित लोगों ने वीर शहीदों के योगदान को याद करते हुए कहा कि इतिहास के इन अमर नायकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर समाज को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस दिया। उनके संघर्ष का उद्देश्य केवल शासन परिवर्तन नहीं था, बल्कि समाज में सम्मान, समानता और आत्मसम्मान की स्थापना करना भी था।

वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1855 में शुरू हुआ हूल आंदोलन भारतीय इतिहास में जनभागीदारी और प्रतिरोध की एक अनूठी मिसाल माना जाता है। उस समय जनजातीय समुदायों ने संगठित होकर ब्रिटिश शासन एवं शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। सिद्धो-कान्हो के नेतृत्व में हजारों लोगों ने संघर्ष किया और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को जनक्रांति का रूप दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि आज के समय में हूल दिवस केवल इतिहास को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का अवसर भी है। युवाओं को इन महान सेनानियों के जीवन, विचार और संघर्ष से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के कार्यों में आगे आना चाहिए।

इस अवसर पर यह भी कहा गया कि देश के विकास और समाज की मजबूती के लिए सभी को समान अवसर, न्याय और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना होगा। वीर सिद्धो-कान्हो का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने अधिकारों और समाज के सम्मान के लिए संगठित होकर संघर्ष किया जा सकता है।

हूल दिवस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने राष्ट्र सेवा, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का संकल्प लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि अमर शहीदों के आदर्शों को केवल स्मरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारना भी जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में सभी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प दोहराया गया।
हूल दिवस पर वीर सिद्धो-कान्हो सहित सभी अमर बलिदानियों को शत-शत नमन किया गया।


