By: Vikash Kumar (Vicky)
क्या लड़के और लड़कियों की पसंद जन्म से ही अलग होती है? यह सवाल लंबे समय से माता-पिता, मनोवैज्ञानिकों और वैज्ञानिकों के बीच चर्चा का विषय रहा है। अक्सर देखा जाता है कि कुछ छोटे बच्चे खिलौने, रंग, खेल या गतिविधियों को लेकर अलग-अलग पसंद दिखाते हैं। इसके बाद सवाल उठता है कि क्या ये अंतर बच्चे के जन्म से ही उसके दिमाग में मौजूद होते हैं या फिर परिवार, समाज और आसपास के माहौल से धीरे-धीरे विकसित होते हैं? विज्ञान इस सवाल का कोई ऐसा सरल जवाब नहीं देता कि लड़कों और लड़कियों की हर पसंद जन्म से तय होती है। शोधों से यह संकेत मिलता है कि बच्चों के व्यवहार और पसंद को समझने में जैविक कारकों के साथ-साथ अनुभव, सीखने की प्रक्रिया और सामाजिक वातावरण की भी भूमिका हो सकती है।

क्या बच्चों की पसंद जन्म से तय होती है?
बच्चे के जन्म के समय उसके मस्तिष्क और शरीर में कई जैविक विशेषताएं मौजूद होती हैं। हार्मोन और मस्तिष्क के विकास से जुड़ी प्रक्रियाएं भी व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बच्चे के जन्म के समय ही यह तय हो जाता है कि वह आगे चलकर कौन-सा खिलौना पसंद करेगा, किस रंग को पसंद करेगा या किस तरह की गतिविधि में अधिक रुचि लेगा। बच्चों की पसंद समय के साथ विकसित होती है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वह अपने माता-पिता, परिवार, दोस्तों, स्कूल और आसपास के समाज से कई चीजें सीखता है। यही अनुभव उसकी रुचियों और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

खिलौनों की पसंद पर क्या कहती है रिसर्च?
बच्चों के खिलौनों से जुड़े व्यवहार पर कई अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोधों में लड़कों और लड़कियों के औसत व्यवहार में अंतर देखा गया है। उदाहरण के लिए, कुछ अध्ययनों में लड़कों में वाहन या अधिक सक्रिय खेलों की ओर औसत रूप से ज्यादा रुचि और लड़कियों में गुड़िया जैसे सामाजिक भूमिका वाले खिलौनों की ओर अधिक रुचि देखी गई। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि औसत अंतर का मतलब हर बच्चे के लिए एक जैसा व्यवहार नहीं होता। बहुत से लड़के गुड़ियों के साथ खेलना पसंद करते हैं और बहुत सी लड़कियां कार, गेंद या दूसरे सक्रिय खेल पसंद करती हैं।
इसलिए किसी बच्चे की पसंद को केवल उसके लिंग के आधार पर तय करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता।

हार्मोन भी कर सकते हैं व्यवहार को प्रभावित
वैज्ञानिक यह भी अध्ययन करते रहे हैं कि जन्म से पहले और जन्म के बाद शरीर में मौजूद हार्मोन व्यवहार और रुचियों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। कुछ शोधों में prenatal androgen exposure और बाद के कुछ खेल व्यवहारों के बीच संबंधों की जांच की गई है। हालांकि ऐसे संबंधों को सीधे यह कहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता कि किसी खास पसंद का कारण केवल हार्मोन ही है। मानव व्यवहार बहुत जटिल होता है और उसमें कई जैविक तथा पर्यावरणीय कारक एक साथ काम कर सकते हैं।

समाज और परिवार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण
अगर किसी बच्चे को बचपन से ही यह बताया जाए कि कोई खिलौना लड़कों के लिए है और दूसरा लड़कियों के लिए, तो इससे उसकी पसंद प्रभावित हो सकती है। इसी तरह बच्चों को मिलने वाले कपड़े, खिलौने, टीवी कंटेंट, किताबें और परिवार की अपेक्षाएं भी उनके व्यवहार पर असर डाल सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी बच्चे को लगातार गुड़िया, किचन सेट या घरेलू भूमिका से जुड़े खिलौने दिए जाएं, तो उसके पास उन्हीं चीजों से खेलने के अवसर अधिक होंगे। दूसरी ओर, यदि किसी बच्चे को कार, बिल्डिंग ब्लॉक, गेंद या दूसरे खेलों के ज्यादा विकल्प दिए जाएं, तो उसकी रुचि उस दिशा में विकसित हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि माता-पिता बच्चे की पसंद पूरी तरह तय कर देते हैं। बल्कि बच्चे की प्राकृतिक रुचि और उसके आसपास के अनुभव एक-दूसरे के साथ मिलकर उसके व्यवहार को आकार दे सकते हैं।

रंगों की पसंद भी जन्म से तय नहीं होती
लड़कों के लिए नीला और लड़कियों के लिए गुलाबी जैसी धारणाएं आज कई समाजों में आम हैं। लेकिन रंगों को लेकर सामाजिक धारणाएं अलग-अलग समय और संस्कृतियों में बदलती रही हैं। इसलिए किसी बच्चे का गुलाबी, नीला, पीला या कोई अन्य रंग पसंद करना उसके लिंग के आधार पर समझना सही नहीं होगा। रंगों की पसंद में व्यक्तिगत अनुभव, उपलब्ध विकल्प और सामाजिक प्रभाव भी भूमिका निभा सकते हैं।
क्या लड़के ज्यादा एक्टिव और लड़कियां ज्यादा शांत होती हैं?
यह धारणा भी पूरी तरह सही नहीं है। बच्चों के ऊर्जा स्तर, खेलने के तरीके और सामाजिक व्यवहार में व्यक्तिगत अंतर बहुत बड़ा हो सकता है। कुछ बच्चे बहुत सक्रिय होते हैं, जबकि कुछ शांत रहना पसंद करते हैं। इसी तरह कुछ बच्चे अकेले खेलना पसंद करते हैं और कुछ बच्चों को समूह में खेलना अच्छा लगता है। इन व्यवहारों को केवल लड़का या लड़की होने के आधार पर समझना वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत सरल निष्कर्ष होगा।

जीन, दिमाग और वातावरण मिलकर बनाते हैं व्यवहार
मानव व्यवहार को केवल एक कारण से समझना मुश्किल है। आनुवंशिकता, हार्मोन, मस्तिष्क का विकास, परिवार, संस्कृति, शिक्षा और व्यक्तिगत अनुभव सभी किसी न किसी स्तर पर बच्चे के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि विज्ञान में अक्सर किसी व्यवहार को लेकर “लड़के ऐसे होते हैं” या “लड़कियां वैसी होती हैं” जैसे बिल्कुल निश्चित निष्कर्षों से बचने की सलाह दी जाती है।

हर बच्चे की पसंद अलग हो सकती है
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी बच्चे की व्यक्तिगत पसंद को उसके लिंग से जोड़कर सीमित नहीं करना चाहिए। यदि कोई लड़की क्रिकेट खेलना चाहती है, तो उसे खेलने दिया जा सकता है। अगर कोई लड़का गुड़िया से खेलना चाहता है, तो इसमें भी कोई असामान्य बात नहीं है। खिलौनों और गतिविधियों के जरिए बच्चे कल्पना, भाषा, सामाजिक कौशल, समस्या समाधान और मोटर स्किल जैसी कई क्षमताएं विकसित करते हैं। इसलिए बच्चों को अलग-अलग तरह के खेल और गतिविधियां आजमाने का अवसर देना उनके विकास के लिए उपयोगी हो सकता है।
तो आखिर क्या है विज्ञान का जवाब?
विज्ञान के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि लड़के और लड़कियों की हर पसंद जन्म से ही अलग और पूरी तरह तय होती है। कुछ व्यवहारों में जैविक कारकों से जुड़े औसत अंतर पाए जा सकते हैं, लेकिन बच्चे की वास्तविक पसंद उसके विकास, अनुभव, परिवार, समाज और व्यक्तिगत व्यक्तित्व से भी प्रभावित होती है। यानी बच्चे की पसंद को केवल उसके जन्म या लिंग से जोड़ना अधूरा निष्कर्ष होगा। प्रकृति और परवरिश दोनों मिलकर बच्चे के व्यवहार को आकार देने में भूमिका निभा सकते हैं।

माता-पिता को क्या ध्यान रखना चाहिए?
माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे की रुचियों को समझने की कोशिश करें और केवल लिंग के आधार पर उसके लिए सीमाएं तय न करें। बच्चों को अलग-अलग खेल, किताबें, कला, संगीत, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों का अनुभव देने से उन्हें अपनी वास्तविक रुचि पहचानने में मदद मिल सकती है।
बच्चे की पसंद अगर परिवार की अपेक्षा से अलग है, तो तुरंत उसे गलत या असामान्य मानने के बजाय यह समझना बेहतर है कि वह किस चीज में खुशी और रुचि महसूस करता है।
यह लेख बच्चों के व्यवहार और पसंद से जुड़े वैज्ञानिक शोधों की सामान्य जानकारी पर आधारित है। वैज्ञानिक अध्ययनों में औसत समूह-अंतर पाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हर लड़के या हर लड़की का व्यवहार एक जैसा होगा। व्यक्तिगत पसंद और व्यवहार पर जैविक, सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत अनुभवों का अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। यह लेख चिकित्सकीय या मनोवैज्ञानिक निदान का विकल्प नहीं है।

