By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के सामाजिक सुधारक सोनम वांगचुक से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद अब उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो अदालत के आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं। जानकारी के अनुसार सोमवार को इस मामले का उल्लेख दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष किया जाएगा, ताकि जल्द सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।

यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद परिवार ने कानूनी विकल्प अपनाने का निर्णय लिया है।
क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से अपने आंदोलन और स्वास्थ्य को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं। उनकी ओर से दायर याचिका में कहा गया कि स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का पक्ष था कि निजी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने से उनका बेहतर इलाज संभव होगा। वहीं संबंधित सरकारी पक्ष ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकारी अस्पताल में भी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं और मरीज की नियमित निगरानी की जा रही है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग पर तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने फिलहाल हस्तक्षेप आवश्यक नहीं माना और उपलब्ध चिकित्सा व्यवस्था को देखते हुए तत्काल आदेश जारी करने से परहेज किया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव आता है या नए तथ्य सामने आते हैं तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है।

अब क्या करेंगे परिवार?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने इस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है। सोमवार को मामले का उल्लेख दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष किया जाएगा, ताकि जल्द सुनवाई की तारीख तय हो सके। परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि स्वास्थ्य के अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए और मरीज की स्थिति को देखते हुए निजी अस्पताल में उपचार की अनुमति दी जानी चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी मरीज को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति देने का निर्णय अदालत उपलब्ध चिकित्सा रिपोर्ट, डॉक्टरों की राय और परिस्थितियों के आधार पर लेती है। यदि याचिकाकर्ता नए चिकित्सीय दस्तावेज या विशेषज्ञों की राय प्रस्तुत करते हैं तो अदालत दोबारा मामले पर विचार कर सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालत का मुख्य उद्देश्य मरीज के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। इसलिए हर निर्णय तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाता है।

स्वास्थ्य के अधिकार पर बहस
इस मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि अदालत हर मामले में परिस्थितियों के अनुसार संतुलित निर्णय लेने का प्रयास करती है।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
सोनम वांगचुक देशभर में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। इसलिए उनके स्वास्थ्य और कानूनी मामले पर सामाजिक संगठनों तथा समर्थकों की नजर बनी हुई है। कई लोगों ने बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग का समर्थन किया है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि अदालत के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए और आगे की प्रक्रिया कानूनी तरीके से पूरी होनी चाहिए।

आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर सोमवार को होने वाली कार्यवाही पर रहेगी। यदि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामले का उल्लेख स्वीकार कर लिया जाता है तो जल्द सुनवाई की संभावना बन सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत यह तय करेगी कि क्या नए तथ्यों के आधार पर पहले के आदेश में किसी प्रकार का बदलाव आवश्यक है या नहीं।

फिलहाल सोनम वांगचुक का उपचार जारी है और परिवार कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।


