By: Vikash, Mala Mandal
पटना/रांची: झारखंड में हुए उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले ने अब अंतरराज्यीय नेटवर्क का रूप ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में रांची पुलिस की विशेष टीम ने बिहार के पटना और गया समेत कई जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर आठ कथित परीक्षा माफियाओं के नाम उजागर किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से भर्ती परीक्षा में हुए बड़े घोटाले का पर्दाफाश होने की उम्मीद बढ़ गई है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान जिन नामों का खुलासा हुआ है उनमें जहानाबाद के सोनू और मनीष, लोहानीपुर के अभिषेक सिन्हा, मालसलामी के अभिषेक छोटू, दानापुर के फिरोज और नवादा के कुछ अन्य संदिग्ध शामिल हैं। इन सभी आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। बताया जा रहा है कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कर रहा था और इस बार उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा को निशाना बनाया गया।

रविवार देर रात रांची पुलिस ने पटना के कंकड़बाग स्थित एक अपार्टमेंट में छापा मारा। हालांकि, मुख्य आरोपी सुधीर पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गया। जानकारी के मुताबिक, सुधीर बोरिंग रोड इलाके में दुकान चलाता है और इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस ने उसके ठिकाने से कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए हैं, जो पूरे नेटवर्क की साजिश को उजागर कर सकते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि सुधीर ‘मास्टरमाइंड’ अतुल वत्स के लिए काम करता था। अतुल वत्स पर आरोप है कि उसने कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के लिए सेटिंग करवाई थी। सूत्रों के मुताबिक, अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाते थे या फिर परीक्षा केंद्र पर विशेष व्यवस्था कराई जाती थी।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने नालंदा और आसपास के इलाकों में भी अपनी जड़ें फैला रखी थीं। तामाड़ थाना क्षेत्र के रुगड़ी गांव में एक निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में अभ्यर्थियों को बुलाकर ‘सेटिंग’ की योजना बनाई गई थी। यहां अभ्यर्थियों को ठहराया गया और उन्हें परीक्षा से जुड़ी जानकारी दी गई। पुलिस को शक है कि इसी जगह से पूरे ऑपरेशन को संचालित किया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के परिजनों से भी लंबी पूछताछ की और कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए। हालांकि, मुख्य आरोपी अब तक फरार हैं, लेकिन पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस मामले में रांची पुलिस की टीम गया के लिए भी रवाना हो गई है, जहां अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

इस पूरे मामले में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक और सॉल्वर गैंग मामले में सरगना समेत पांच मुख्य आरोपियों और तीन अभ्यर्थियों को रिमांड पर लिया गया है। तामाड़ पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश किए गए आवेदन के बाद अदालत ने इन आरोपियों को पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया है, जबकि तीन अभ्यर्थियों को दो दिन की रिमांड पर रखा गया है।
रिमांड पर लिए गए आरोपियों में अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद शामिल हैं। पुलिस इनसे गहन पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जो इस रैकेट से जुड़े हुए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई राज्यों के गिरोह शामिल हो सकते हैं। इसलिए जांच को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी परीक्षाओं में सेंधमारी की है और कितने अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से पास कराया गया है।
इस घटना ने झारखंड और बिहार दोनों राज्यों में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों में भी इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि कड़ी मेहनत के बावजूद यदि इस तरह की धांधली होती है, तो ईमानदार छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाता है।

सरकार और प्रशासन अब इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच की दिशा क्या मोड़ लेती है और इस बड़े परीक्षा घोटाले में किन-किन लोगों की संलिप्तता सामने आती है।

