By: Vikash, Mala Mandal
झारखंड में जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बड़े राष्ट्रीय कार्य के लिए अंतिम रूपरेखा तैयार कर ली है। अब 16 मई 2026 से राज्यभर में घर-घर जाकर डेटा संग्रह की प्रक्रिया शुरू होगी। इस दौरान अधिकारी प्रत्येक परिवार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करेंगे, इसलिए नागरिकों को अपने जवाब पहले से तैयार रखने की सलाह दी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, जनगणना का पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के रूप में किया जाएगा। यह चरण पूरे देश में 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। झारखंड में इसका निर्धारित समय 16 मई से 14 जून 2026 तक तय किया गया है। इस दौरान अधिकारी हर घर तक पहुंचकर भवन, सुविधाओं और घरेलू स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे।

इससे पहले 1 मई से 15 मई 2026 तक नागरिकों को ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ यानी स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का मौका दिया गया है। यह सुविधा डिजिटल जनगणना का हिस्सा है, जिससे लोग अपने घर बैठे ही जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद अधिकारी घर पहुंचकर इन जानकारियों का सत्यापन करेंगे।
जनगणना 2027 को खास बनाता है इसका डिजिटल स्वरूप। यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे डेटा संग्रहण अधिक सटीक और पारदर्शी होने की उम्मीद है। सरकार ने इस बार 33 सवालों का एक विस्तृत प्रश्नावली तैयार की है, जिसमें घर की स्थिति, पानी-बिजली की उपलब्धता, शौचालय, रसोई, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।

इसके अलावा परिवार के सदस्यों की संख्या, लिंग, सामाजिक वर्ग, संपत्ति और जीवनशैली से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार भविष्य की योजनाओं और नीतियों को तैयार करेगी। जनगणना से प्राप्त डेटा देश के विकास, संसाधनों के वितरण और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाता है।
अधिकारियों के अनुसार, इस बार जनगणना प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों को डिजिटल उपकरणों और डेटा संग्रह की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो।

जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी जैसे नाम, उम्र, धर्म, जाति और अन्य व्यक्तिगत विवरण दर्ज किए जाएंगे। यह चरण देश की कुल आबादी का आधिकारिक आंकड़ा तय करेगा।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जनगणना के दौरान पूरा सहयोग करें और सही जानकारी दें। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसमें गलत जानकारी देने या सहयोग न करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Census 2027 देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि यह 16 साल बाद हो रहा है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोरोना महामारी के कारण टल गई थी। अब नई जनगणना से देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
झारखंड के संदर्भ में यह जनगणना और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राज्य में विकास योजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और जनसंख्या का वितरण जैसे अहम पहलुओं पर सटीक डेटा मिलेगा।

इसलिए नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने परिवार से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी पहले से तैयार रखें। खासकर घर की स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, सुविधाओं की उपलब्धता और अन्य जरूरी विवरण स्पष्ट रखें ताकि अधिकारी के आने पर सही और त्वरित जानकारी दी जा सके।
कुल मिलाकर, झारखंड में Census 2027 की शुरुआत एक बड़े प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव का संकेत है। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से यह प्रक्रिया न केवल तेज होगी बल्कि अधिक विश्वसनीय भी बनेगी। आने वाले समय में यह डेटा राज्य और देश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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