By: Mala Mandal
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा को लेकर लोगों में क्यों है कन्फ्यूजन?
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने की परंपरा है। साल 2026 में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई लोग 30 मई को पूर्णिमा मान रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग 31 मई को व्रत और स्नान-दान का शुभ दिन बता रहे हैं। ऐसे में यदि आप भी सही तारीख को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो यहां जानिए ज्योतिष गणना के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा व्रत कब रखा जाएगा और स्नान-दान का सबसे शुभ समय क्या रहेगा।

कब शुरू होगी पूर्णिमा तिथि?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026 को दोपहर बाद शुरू होगी और 31 मई 2026 तक रहेगी। हिंदू धर्म में पूर्णिमा व्रत उदया तिथि के अनुसार रखा जाता है। इसी कारण अधिकांश ज्योतिषाचार्य और पंचांग विशेषज्ञ 31 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा व्रत रखने की सलाह दे रहे हैं।

30 या 31 मई, कब रखें पूर्णिमा व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होती है, उसी दिन पूर्णिमा व्रत रखा जाता है। ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा व्रत 31 मई 2026, रविवार को रखा जाएगा। वहीं 30 मई की रात से ही श्रद्धालु पूजा-पाठ और चंद्र दर्शन की तैयारी शुरू कर सकते हैं।
स्नान-दान का शुभ समय कब रहेगा?
पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, गरीबों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। ज्येष्ठ माह की तेज गर्मी में जल दान और छाता दान को भी बेहद शुभ माना जाता है। 31 मई की सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर तक स्नान-दान करना शुभ रहेगा।

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और सच्चे मन से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही, चंद्र देव की पूजा करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
अधिक मास में पूर्णिमा का क्यों बढ़ जाता है महत्व?
अधिक मास को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना गया है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है। इसलिए अधिक मास की पूर्णिमा पर व्रत और पूजा का महत्व सामान्य पूर्णिमा से भी ज्यादा माना जाता है। इस दिन धार्मिक कार्य करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

पूर्णिमा व्रत पूजा विधि
पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। घर के मंदिर में दीपक जलाएं और विष्णु सहस्रनाम या सत्यनारायण कथा का पाठ करें। शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले लोग दिनभर सात्विक भोजन करें और जरूरतमंद लोगों को दान अवश्य दें।

इन चीजों का दान करना माना जाता है शुभ
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन जल से भरा घड़ा, पंखा, छाता, फल, सफेद वस्त्र, चावल और शरबत का दान करना बेहद पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे जीवन की परेशानियां कम होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 31 मई 2026 को उदया तिथि में पूर्णिमा होने के कारण इसी दिन व्रत, पूजा और स्नान-दान करना अधिक शुभ रहेगा। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों के पंचांग में समय को लेकर थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग जरूर देखें।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार तिथि और मुहूर्त में बदलाव संभव है। किसी भी धार्मिक कार्य से पहले स्थानीय पंडित या ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लें।

