By: Mala Manda
Birth and Death Registration Amendment Bill 2026: देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे के बीच शुक्रवार को लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया। अब इस विधेयक को मंजूरी के लिए राज्यसभा में भेजा जाएगा। यदि राज्यसभा से भी इसे मंजूरी मिल जाती है और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो जाती है, तो यह कानून के रूप में लागू होगा।

सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना, रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाना और समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना है। नए प्रावधान लागू होने के बाद नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित लोगों और संस्थानों के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
क्या है जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026?
यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े मौजूदा कानून में बदलाव का प्रस्ताव करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर सरकारी प्रणाली में दर्ज हो। इससे नागरिकों के आधिकारिक रिकॉर्ड अधिक सटीक होंगे और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुविधा मिलेगी।

क्यों जरूरी है जन्म और मृत्यु का पंजीकरण?
जन्म प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति की पहचान, आयु और नागरिक रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। स्कूल में प्रवेश, पासपोर्ट, आधार, सरकारी योजनाओं और कई अन्य कार्यों में इसकी आवश्यकता पड़ती है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति, बैंक खाते, बीमा दावों, पेंशन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए जरूरी दस्तावेज माना जाता है।

नए संशोधन में क्या हो सकते हैं प्रमुख बदलाव?
विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु की सूचना समय पर दर्ज कराने की जिम्मेदारी को अधिक स्पष्ट बनाना है। अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है। रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और डेटा की शुद्धता को मजबूत करने की दिशा में भी प्रावधान किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने या निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधानों को भी अधिक प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
यदि विधेयक कानून बनता है तो लोगों को जन्म और मृत्यु का पंजीकरण तय समयसीमा के भीतर कराना होगा। आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा करना और सही जानकारी देना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। देर करने या गलत जानकारी देने की स्थिति में अतिरिक्त प्रक्रिया या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

डिजिटल रिकॉर्ड को मिलेगा बढ़ावा
सरकार लगातार नागरिक सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है। जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने से प्रमाण पत्र प्राप्त करना आसान हो सकता है और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने में भी मदद मिल सकती है।

राज्यसभा की मंजूरी के बाद ही लागू होगा कानून
फिलहाल यह विधेयक केवल लोकसभा से पारित हुआ है। इसे कानून बनने के लिए राज्यसभा से मंजूरी और उसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होगी। इसके बाद ही सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगी और नए नियम लागू होंगे।

सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि इस संशोधन से देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली अधिक मजबूत होगी। समय पर पंजीकरण, डिजिटल रिकॉर्ड, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने से नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी और सरकारी रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनेंगे।

यह लेख उपलब्ध संसदीय जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। विधेयक अभी संसद की पूरी प्रक्रिया से गुजरना बाकी है। अंतिम नियम, प्रावधान और लागू होने की तिथि राज्यसभा की मंजूरी, राष्ट्रपति की स्वीकृति तथा सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के बाद ही प्रभावी होंगे। आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना अवश्य देखें।

