By: Vikash, Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। साइबर थाना देवघर की टीम ने लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी योजनाओं और कैशबैक ऑफर के नाम पर लोगों को ठगने का काम कर रहा था। इस कार्रवाई से इलाके में सक्रिय साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर एक बड़ा झटका लगा है।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर थाना प्रभारी के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी को पकड़ा गया। प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से विभिन्न तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी खुद को कभी बैंक अधिकारी, कभी वित्तीय कंपनी का प्रतिनिधि तो कभी सरकारी योजना का एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करता था। इसके बाद वह लोगों को विभिन्न योजनाओं का लालच देकर उनसे पैसे ऐंठता था। खासतौर पर ग्रामीण और कम जागरूक लोगों को निशाना बनाया जाता था।

पुलिस के अनुसार, आरोपी द्वारा अपनाए गए ठगी के तरीके बेहद शातिर और योजनाबद्ध थे। सबसे पहले वह लोगों को प्रधानमंत्री किसान योजना के नाम पर फर्जी लिंक भेजता था। इस लिंक के माध्यम से लोगों से उनकी निजी जानकारी हासिल की जाती थी और फिर उन्हें योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर ठगी की जाती थी।
इसके अलावा आरोपी धनराशि दिलाने के नाम पर भी लोगों को अपने जाल में फंसाता था। वह खुद को एक प्रतिष्ठित फाइनेंस कंपनी का अधिकारी बताकर आसान शर्तों पर लोन दिलाने का वादा करता था। जैसे ही कोई व्यक्ति उसकी बातों में आ जाता, उससे प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर पैसे ले लिए जाते थे।

इतना ही नहीं, आरोपी द्वारा कैशबैक ऑफर का भी खूब इस्तेमाल किया जाता था। वह लोगों को PhonePe और अन्य डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के माध्यम से कैशबैक दिलाने का लालच देता था। इसके लिए वह फर्जी गिफ्ट कार्ड बनाकर लोगों से उसे रिडीम करने को कहता था, जिससे उनके खाते से पैसे निकल जाते थे।
एक अन्य तरीका यह भी सामने आया है कि आरोपी एयरटेल पेमेंट बैंक से जुड़ा होने का दावा करता था और ‘Airtel Thanks App’ के जरिए लोगों को कैशबैक देने का झांसा देता था। वह लोगों से उनके बैंक कार्ड की जानकारी लेकर उसे अपडेट करने के नाम पर ठगी करता था।

पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल वह इस पूरे साइबर अपराध को अंजाम देने में करता था। बरामद उपकरणों को जब्त कर लिया गया है और उनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके।
इस पूरे मामले में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। साइबर थाना की टीम डिजिटल ट्रेल के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान में जुटी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क अन्य जिलों और राज्यों तक फैला हो सकता है।

पुलिस अधीक्षक ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। विशेष रूप से सरकारी योजनाओं, लोन ऑफर या कैशबैक से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाना में शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते सूचना देने पर कई मामलों में पैसे वापस मिलने की संभावना रहती है।

इस कार्रवाई में साइबर थाना के साथ-साथ अन्य थानों की पुलिस टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अधिकारियों और जवानों की सतर्कता और तत्परता के कारण यह सफलता संभव हो पाई है।
देवघर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल अपराधियों में डर का माहौल बना है, बल्कि आम लोगों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में लोगों को जागरूक रहना बेहद जरूरी है। किसी भी तरह की लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
अंततः, यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। पुलिस की सक्रियता और जनता के सहयोग से ही इस तरह के अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकती है।

