By: Mala Mandal
देवघर। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारीज देवघर सेवा केंद्र की ओर से मंडल कारा में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कैदियों के बीच रक्षाबंधन का त्योहार आध्यात्मिक एवं सकारात्मक संदेश के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पारंपरिक रूप से राखी बांधना नहीं, बल्कि कैदियों को जीवन में नैतिक मूल्यों, आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत ब्रह्माकुमारीज देवघर सेवा केंद्र की मुख्य संचालिका रीता दीदी द्वारा मंडल कारा के जेलर प्रमोद कुमार को रक्षा सूत्र बांधकर की गई। इसके बाद ब्रह्माकुमारीज की बहनों ने जेल में मौजूद कैदियों के बीच रक्षाबंधन का पर्व मनाया और उन्हें भाईचारे, सद्भावना तथा बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया।

इस अवसर पर रीता दीदी ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान संगमयुग में जब समाज नैतिक मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, ऐसे समय में रक्षाबंधन प्रत्येक मानव आत्मा को विकारों से मुक्त होकर पावन बनने का ईश्वरीय संदेश देता है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वयं के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने और जीवन को श्रेष्ठ बनाने का अवसर भी है।

रीता दीदी ने रक्षाबंधन के पारंपरिक अनुष्ठानों के पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्यों को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि माथे पर लगाया जाने वाला तिलक आत्म-स्मृति का प्रतीक है। तिलक व्यक्ति को देह-अभिमान से ऊपर उठकर आत्म-चेतना में स्थित होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य स्वयं को शरीर के बजाय एक चेतन आत्मा के रूप में अनुभव करता है, तब उसके विचारों और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है।

उन्होंने कलाई पर बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र के महत्व को भी समझाया। उनके अनुसार राखी केवल सुरक्षा का धागा नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म में काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकार जैसे विकारों से मुक्त रहने की दृढ़ प्रतिज्ञा का प्रतीक है। रक्षाबंधन के अवसर पर व्यक्ति को स्वयं से यह संकल्प लेना चाहिए कि वह अपने जीवन में नकारात्मक विचारों और बुरी आदतों को कम करते हुए सत्य, शांति, प्रेम और सद्भावना को अपनाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख मीठा कराने की परंपरा का भी आध्यात्मिक अर्थ बताया गया। रीता दीदी ने कहा कि मिठाई खिलाने का संदेश केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में हमेशा मधुर वाणी बोलने, दूसरों के प्रति शुभभावना रखने और अपने आचरण से किसी को दुःख नहीं पहुंचाने का संकल्प है। मधुर वाणी और सकारात्मक व्यवहार व्यक्ति के साथ-साथ उसके आसपास के वातावरण को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने रक्षाबंधन पर दिए जाने वाले उपहार को भी आध्यात्मिक दृष्टि से समझाया। सामान्य तौर पर राखी बांधने के बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है, लेकिन रक्षाबंधन का सच्चा उपहार केवल भौतिक वस्तुओं का आदान-प्रदान नहीं है। इसके बजाय व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद किसी पुरानी बुरी आदत, व्यसन या नकारात्मक वृत्ति को परमात्मा को समर्पित करने का संकल्प लेना चाहिए। यही आत्मिक परिवर्तन रक्षाबंधन की वास्तविक सार्थकता है।

इसके बाद रीता दीदी एवं ब्रह्माकुमारीज की अन्य बहनों ने मंडल कारा में बंद कैदियों को तिलक लगाया। उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा गया और उनका मुख मीठा कराया गया। इस दौरान कैदियों को जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने, बुरी आदतों को छोड़ने और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम ने जेल के वातावरण में भी आत्मीयता, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया।

ब्रह्माकुमारीज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कैदियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें यह संदेश दिया गया कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मनुष्य अपने विचारों और कर्मों में सकारात्मक बदलाव लाकर नई शुरुआत कर सकता है। आत्मचिंतन और अच्छे संस्कार व्यक्ति के जीवन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में मंडल कारा के जेलर प्रमोद कुमार, लिपिक पवन रूंगदा, हवालदार रोशन कुमार सहित अन्य जेलकर्मी उपस्थित रहे। वहीं ब्रह्माकुमारीज की ओर से मुख्य संचालिका रीता दीदी के अलावा ललिता बहन, शांति बहन, कल्पना बहन, रीना बहन, सुनैना बहन, सुनील भाई, धनंजय भाई, आशीष भाई, श्रवण भाई, मनीष भाई, रामप्रवेश भाई एवं गोपाल भाई मौजूद रहे।

रक्षाबंधन के इस आयोजन ने त्योहार को सामाजिक और आध्यात्मिक सरोकारों से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि राखी का धागा केवल रिश्तों की डोर नहीं, बल्कि आत्म-संयम, सद्भावना और सकारात्मक जीवन का संकल्प भी है। मंडल कारा में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से कैदियों को अपने भीतर की नकारात्मकता को छोड़कर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने तथा समाज में सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा दी गई।

