By: Mala Mandal
देवघर में श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच प्रशासन द्वारा बेहतर यातायात व्यवस्था के किए गए दावों पर जसीडीह की स्थिति सवाल खड़े कर रही है। जहां एक ओर जिला प्रशासन और पुलिस ने शहर को जाममुक्त रखने के लिए कई स्तरों पर ट्रैफिक प्लान लागू किया है, वहीं दूसरी ओर जसीडीह थाना क्षेत्र में मुख्य सड़क ही अस्थायी बस स्टैंड में तब्दील होती नजर आ रही है। डढ़वा नदी पुल से लेकर जसीडीह मुख्य मार्ग तक सड़क के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में बसें खड़ी रहने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

श्रावणी मेले के दौरान हर दिन लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं का देवघर आगमन हो रहा है। इस भीड़ को नियंत्रित करने और शहर में जाम की समस्या से बचने के लिए जिला प्रशासन ने बाघमारा स्थित आईएसबीटी (इंटीग्रेटेड बस स्टैंड) को बसों के ठहराव के लिए अधिकृत किया था। इसके साथ ही विभिन्न मार्गों पर नो एंट्री व्यवस्था लागू कर यातायात संचालन को व्यवस्थित करने का दावा भी किया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।

जसीडीह थाना क्षेत्र के डढ़वा नदी पुल से लेकर चकाई मोड़ और मुख्य सड़क तक दर्जनों यात्री बसें सड़क किनारे खड़ी देखी जा रही हैं। कई बस चालक निर्धारित आईएसबीटी में जाने के बजाय मुख्य सड़क, पेट्रोल पंप परिसर और आसपास की खाली जमीनों को ही पार्किंग स्थल बना रहे हैं। इससे सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

शुक्रवार, 31 जुलाई की सुबह भी जसीडीह के एक पेट्रोल पंप परिसर तथा उसके आसपास बड़ी संख्या में यात्री बसें खड़ी देखी गईं। सड़क किनारे बसों की लंबी कतार लगने से मुख्य मार्ग संकरा हो गया, जिससे छोटे-बड़े वाहनों को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर वाहन चालकों को लंबे समय तक धीमी गति से चलना पड़ा, जिससे जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा बसों के लिए अलग से आईएसबीटी की व्यवस्था किए जाने के बावजूद बस चालकों द्वारा उसका पालन नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सड़क किनारे अवैध पार्किंग के कारण आम लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो किसी भी समय बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।

श्रावणी मेले के दौरान जसीडीह रेलवे स्टेशन और बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सड़क पर खड़ी बसें न केवल ट्रैफिक जाम का कारण बन रही हैं बल्कि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं और कांवरियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं को सड़क के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।

यातायात विशेषज्ञों का भी मानना है कि मुख्य सड़क पर भारी वाहनों की पार्किंग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यदि बसों का ठहराव निर्धारित बस स्टैंड पर सुनिश्चित कराया जाए तो सड़क पर वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात अधिक सुचारू रूप से संचालित हो सकेगा। साथ ही आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड को भी रास्ता मिलने में आसानी होगी।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि निर्धारित आईएसबीटी में ही सभी बसों का पड़ाव सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही मुख्य सड़क, पेट्रोल पंप परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से बस खड़ी करने वाले चालकों और संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि श्रावणी मेले जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयोजन में यातायात व्यवस्था किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

लोगों का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन नियमित निगरानी रखे, ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाए और नियमों का कड़ाई से पालन कराए तो जसीडीह में उत्पन्न इस समस्या का समाधान आसानी से किया जा सकता है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी बल्कि स्थानीय लोगों को भी जाम और दुर्घटनाओं के खतरे से मुक्ति मिलेगी।

फिलहाल जसीडीह की तस्वीर प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखा रही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं, ताकि श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनी रहे।

