By: Mala Mandal
वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण और पुण्यदायी माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-शांति बनी रहती है।

कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई 2026 को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं अमावस्या तिथि का समापन 17 मई 2026 को रात्रि 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखकर देवी सावित्री और वट वृक्ष की पूजा करेंगी।

क्यों की जाती है वट वृक्ष की पूजा
धार्मिक मान्यताओं में वट वृक्ष को बेहद पवित्र और दीर्घायु का प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इसी कारण इस वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि वट वृक्ष की परिक्रमा और पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है व्रत
पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत सुहाग और पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने लगा। माना जाता है कि जो महिलाएं श्रद्धा भाव से वट सावित्री व्रत करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

वट सावित्री व्रत की पूजा विधि
वट सावित्री व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा का संकल्प लें और व्रत का पालन करें। महिलाएं वट वृक्ष के नीचे जाकर जल, रोली, अक्षत, फूल और फल अर्पित करती हैं। इसके बाद कच्चा सूत या रक्षा सूत्र लेकर वट वृक्ष की सात या 108 बार परिक्रमा की जाती है। पूजा के दौरान सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना और देवी सावित्री का ध्यान करना शुभ माना जाता है।

पूजा का शुभ समय क्या रहेगा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष की पूजा प्रातःकाल या सुबह के शुभ मुहूर्त में करना उत्तम माना जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर तक पूजा का विशेष महत्व रहेगा। महिलाएं अपने घर या मंदिर के पास स्थित वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना कर सकती हैं।
व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
व्रत करने वाली महिलाओं को इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और क्रोध या नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करनी चाहिए। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को दान करना भी शुभ माना जाता है।

वट सावित्री व्रत से मिलते हैं ये शुभ फल
धार्मिक मान्यता है कि वट सावित्री व्रत करने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होने लगती हैं। यह व्रत महिलाओं को मानसिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। किसी भी पूजा या व्रत को करने से पहले स्थानीय पंडित या ज्योतिषाचार्य से सलाह अवश्य लें।

