By: Mala Mandal
Dalchini Asli Hai Ya Nakli Kaise Pahchane: दालचीनी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले सबसे लोकप्रिय मसालों में से एक है। चाय से लेकर मिठाई, सब्जी और कई तरह के व्यंजनों में इसकी खुशबू और स्वाद खाने को खास बना देता है। आयुर्वेद और पारंपरिक घरेलू नुस्खों में भी दालचीनी का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाली हर भूरी और मुड़ी हुई छाल असली दालचीनी नहीं होती? कई बार दुकानों पर असली दालचीनी के नाम पर कैसिया बिकती है। दोनों देखने में काफी हद तक एक जैसी लग सकती हैं, इसलिए आम लोगों के लिए इनके बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है।

कैसिया भी एक मसाला है और इसका इस्तेमाल कई जगहों पर किया जाता है, लेकिन इसमें असली सीलोन दालचीनी की तुलना में कूमारिन की मात्रा काफी अधिक हो सकती है। कूमारिन की अधिक मात्रा का लंबे समय तक सेवन कुछ लोगों के लिए विशेष रूप से लिवर के लिहाज से चिंता का विषय हो सकता है। इसलिए दालचीनी खरीदते समय उसकी पहचान करना और सही मात्रा में इस्तेमाल करना जरूरी है।
असली दालचीनी और कैसिया में क्या अंतर है?
असली दालचीनी को आमतौर पर सीलोन दालचीनी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Cinnamomum verum है। दूसरी तरफ कैसिया की अलग प्रजातियां होती हैं और यह भी मसाले के रूप में इस्तेमाल की जाती है।
दोनों की खुशबू, स्वाद, बनावट और छाल की संरचना में अंतर होता है। सबसे बड़ा अंतर इसकी छाल की परतों और मोटाई में आसानी से देखा जा सकता है।
अगर आप कुछ आसान संकेतों पर ध्यान दें, तो बाजार से दालचीनी खरीदते समय असली और कैसिया के बीच काफी हद तक अंतर समझ सकते हैं।

1. दालचीनी की छाल को ध्यान से देखें
असली सीलोन दालचीनी की छाल आमतौर पर बहुत पतली और नाजुक होती है। इसकी कई पतली परतें एक-दूसरे के अंदर लिपटी हुई दिखाई देती हैं। यह देखने में सिगरेट जैसी कई परतों वाली रोल की तरह लग सकती है।
वहीं कैसिया की छाल अपेक्षाकृत मोटी और सख्त होती है। इसमें अक्सर एक ही मोटी परत अंदर की तरफ मुड़ी हुई दिखाई देती है।
इसलिए दालचीनी खरीदते समय केवल उसका रंग देखकर फैसला न करें। उसकी छाल की मोटाई और परतों को जरूर देखें।

2. रंग से करें शुरुआती पहचान
असली सीलोन दालचीनी का रंग आमतौर पर हल्का भूरा या टैन जैसा होता है। दूसरी ओर कैसिया का रंग अपेक्षाकृत गहरा लाल-भूरा या गहरा भूरा हो सकता है।
हालांकि केवल रंग के आधार पर असली और नकली का फैसला करना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग किस्म और प्रोसेसिंग के कारण रंग में बदलाव हो सकता है। रंग के साथ छाल की बनावट और परतों को भी देखें।

3. दालचीनी की मोटाई पर दें ध्यान
अगर दालचीनी की स्टिक बहुत मोटी, कठोर और भारी लग रही है तो वह कैसिया हो सकती है। सीलोन दालचीनी की छाल पतली और हल्की होती है तथा इसे हाथ से तोड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
कैसिया की छाल काफी कठोर होती है और इसे तोड़ने पर मोटे टुकड़े निकल सकते हैं।
हालांकि यह तरीका भी अकेले 100 प्रतिशत पहचान की गारंटी नहीं देता। बेहतर पहचान के लिए कई संकेतों को एक साथ देखना चाहिए।
4. स्वाद में भी होता है अंतर
असली सीलोन दालचीनी का स्वाद हल्का, मीठा और सुगंधित होता है। इसमें तीखापन अपेक्षाकृत कम महसूस होता है।
कैसिया का स्वाद ज्यादा तेज, तीखा और गर्म महसूस हो सकता है। इसकी खुशबू भी अधिक तीव्र होती है।
अगर दालचीनी का छोटा सा टुकड़ा इस्तेमाल करने पर स्वाद बहुत ज्यादा तीखा या कड़वा महसूस हो तो यह कैसिया की ओर संकेत कर सकता है। हालांकि केवल स्वाद के आधार पर भी पहचान पक्की नहीं की जा सकती।

5. खुशबू से पहचानने का तरीका
असली दालचीनी की खुशबू सामान्यतः हल्की, मीठी और सुगंधित होती है। वहीं कैसिया में तेज और अधिक तीखी खुशबू हो सकती है।
दालचीनी खरीदते समय अगर संभव हो तो स्टिक को हल्का सा सूंघकर देखें। बहुत तेज और तीखी सुगंध कैसिया की संभावना की ओर संकेत कर सकती है।
6. पाउडर वाली दालचीनी में पहचान मुश्किल
दालचीनी पाउडर खरीदते समय असली और कैसिया के बीच अंतर करना काफी मुश्किल हो जाता है। पिसे हुए मसाले में दोनों को केवल देखकर पहचानना लगभग संभव नहीं होता।
इसलिए अगर आपको असली सीलोन दालचीनी चाहिए तो साबुत स्टिक खरीदना बेहतर विकल्प हो सकता है। घर पर जरूरत के अनुसार इसे पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
साबुत मसाले खरीदने से मिलावट की पहचान करना भी अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।

कैसिया में कूमारिन ज्यादा क्यों चर्चा में रहता है?
कूमारिन एक प्राकृतिक यौगिक है जो कई पौधों में पाया जाता है। कैसिया दालचीनी में इसकी मात्रा सीलोन दालचीनी की तुलना में काफी अधिक हो सकती है। कूमारिन की बहुत अधिक मात्रा का लंबे समय तक सेवन लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी वजह से रोजाना बड़ी मात्रा में दालचीनी का सेवन करने वाले लोगों को इसके स्रोत और मात्रा पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि कैसिया की थोड़ी मात्रा खाना तुरंत नुकसानदायक है। सामान्य मसाले के रूप में सीमित मात्रा में इस्तेमाल और लंबे समय तक अत्यधिक सेवन के बीच अंतर समझना जरूरी है।
क्या दालचीनी खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
नहीं। दालचीनी एक सामान्य मसाला है और भोजन में थोड़ी मात्रा में इसका इस्तेमाल किया जाता है। चिंता मुख्य रूप से अत्यधिक मात्रा या लंबे समय तक अधिक सेवन से जुड़ी हो सकती है। अगर आप रोजाना बड़ी मात्रा में दालचीनी पाउडर लेते हैं या इसे किसी घरेलू नुस्खे के रूप में नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं, तो मात्रा को लेकर सावधानी बरतना बेहतर है। अगर आपको लिवर से जुड़ी कोई बीमारी है या आप नियमित रूप से दवाएं लेते हैं, तो दालचीनी की अधिक मात्रा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा।

बाजार से असली दालचीनी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
दालचीनी खरीदते समय सबसे पहले साबुत स्टिक को प्राथमिकता दें। उसकी मोटाई, परतें, रंग और खुशबू देखें। बहुत मोटी और कठोर छाल कैसिया हो सकती है, जबकि पतली और कई परतों में लिपटी छाल सीलोन दालचीनी की विशेषता हो सकती है। पैकेट वाला मसाला खरीद रहे हैं तो लेबल पर उत्पाद का नाम, वनस्पति स्रोत, निर्माता और अन्य जरूरी जानकारी जरूर पढ़ें। केवल ‘दालचीनी’ लिखा होने से यह जरूरी नहीं कि वह सीलोन दालचीनी ही हो।
क्या पानी वाला टेस्ट करके असली दालचीनी पहचान सकते हैं?
सोशल मीडिया पर दालचीनी की असलियत जांचने के कई घरेलू टेस्ट बताए जाते हैं, लेकिन हर घरेलू टेस्ट वैज्ञानिक रूप से भरोसेमंद नहीं होता। इसलिए केवल पानी में डालकर, जलाकर या किसी एक घरेलू प्रयोग के आधार पर दालचीनी को असली या नकली घोषित करना उचित नहीं है। अगर आपको प्रामाणिक सीलोन दालचीनी चाहिए तो भरोसेमंद ब्रांड या विश्वसनीय विक्रेता से खरीदना और पैकेजिंग पर दी गई जानकारी देखना ज्यादा बेहतर तरीका है।

असली दालचीनी की पहचान का आसान फॉर्मूला
दालचीनी की स्टिक पतली और कई परतों वाली है, रंग हल्का भूरा है, खुशबू मीठी और स्वाद हल्का है, तो सीलोन दालचीनी होने की संभावना अधिक हो सकती है। वहीं अगर स्टिक मोटी, सख्त, गहरे रंग की और स्वाद में काफी तीखी है, तो वह कैसिया हो सकती है। फिर भी घर पर केवल देखकर 100 प्रतिशत पुष्टि करना संभव नहीं है। वास्तविक प्रजाति की पुष्टि के लिए विश्वसनीय पैकेजिंग या प्रमाणित स्रोत पर भरोसा करना सबसे अच्छा तरीका है।
दालचीनी खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत या रंग देखकर फैसला करना सही नहीं है। असली सीलोन दालचीनी आमतौर पर पतली, हल्के रंग की और कई परतों वाली होती है, जबकि कैसिया की छाल मोटी, सख्त और गहरे रंग की हो सकती है।

अगर आप दालचीनी का नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं तो साबुत स्टिक खरीदना, विश्वसनीय स्रोत से मसाला लेना और जरूरत से ज्यादा सेवन से बचना समझदारी है। खासकर लंबे समय तक अधिक मात्रा में दालचीनी लेने से पहले उसकी किस्म और मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।
यह लेख सामान्य जानकारी और खाद्य पदार्थों से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। घर पर किए जाने वाले पहचान परीक्षण असली सीलोन दालचीनी और कैसिया की 100 प्रतिशत वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करते। किसी भी खाद्य पदार्थ का अत्यधिक सेवन न करें। यदि आपको लिवर से जुड़ी बीमारी है, आप नियमित दवाएं लेते हैं या किसी खाद्य पदार्थ के सेवन को लेकर चिंता है, तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।
