By: Mala Mandal
देवघर नगर निगम के सफाई कर्मियों की हड़ताल अब उग्र रूप लेती दिखाई दे रही है। लंबे समय से वेतन भुगतान में अनियमितता और ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) की बकाया राशि जमा नहीं किए जाने के आरोपों के बीच सफाई कर्मियों ने शहर की प्रमुख सड़कों और चौराहों पर कचरा फैलाकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

बुधवार को बड़ी संख्या में सफाई कर्मी सड़कों पर उतरे और विरोध स्वरूप विभिन्न इलाकों में जमा कचरे को सार्वजनिक स्थानों पर डालकर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान शहर के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होती दिखाई दी और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्मचारियों ने लगाए वेतन और ईपीएफ भुगतान में लापरवाही के आरोप
प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से बढ़ा हुआ वेतन नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की राशि भी नियमित रूप से जमा नहीं की जा रही है। प्रदर्शन में शामिल सफाईकर्मी पवन कुमार राम ने बताया कि लगभग 40 महीनों से ईपीएफ और पीएफ से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। कर्मचारियों को यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही कि उनके खातों में राशि जमा हुई है या नहीं। उनका कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक माह का वेतन भुगतान किया गया है, लेकिन इससे कर्मचारियों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। कर्मचारियों की मांग है कि सभी बकाया राशि का भुगतान किया जाए और भविष्य में वेतन व ईपीएफ भुगतान की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ा असर
सफाई कर्मियों की हड़ताल का असर अब पूरे शहर में दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में कचरे का उठाव नहीं होने से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। सार्वजनिक स्थलों पर जमा हो रहे कचरे के कारण दुर्गंध और गंदगी की समस्या बढ़ने लगी है। शहरवासियों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगें यदि वास्तविक हैं तो उनका समाधान होना चाहिए, लेकिन विरोध प्रदर्शन के तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाना आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के विरोध से संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ सकती है। विशेषकर बरसात के मौसम में सड़क और नालियों में कचरा जमा होने से जलनिकासी व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है, जिससे शहरी जीवन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

प्रदर्शन के तरीके पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
सफाई कर्मियों के आंदोलन को लेकर शहर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक वर्ग कर्मचारियों की मांगों को उचित बताते हुए प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग कर रहा है। वहीं दूसरा वर्ग विरोध के तरीके पर सवाल उठा रहा है। लोगों का कहना है कि हड़ताल और आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन विरोध ऐसा होना चाहिए जिससे आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो। कुछ नागरिकों ने सुझाव दिया कि नगर निगम प्रशासन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच तत्काल वार्ता आयोजित की जानी चाहिए ताकि स्थिति सामान्य हो सके।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
सफाई कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।

वहीं दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में शहरवासियों की नजर प्रशासन और कर्मचारियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर बनी हुई है।

फिलहाल देवघर नगर निगम और सफाई कर्मियों के बीच गतिरोध बरकरार है, जिसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यदि समाधान नहीं निकलता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

