By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में शुक्रवार को सशस्त्र सीमा बल (SSB) के मुख्यालय में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत और जवानों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात की। कार्यक्रम के दौरान लगभग 189 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे का एक प्रमुख राजनीतिक और वैचारिक पहलू ‘वंदे मातरम्’ को लेकर उनका बयान भी रहा। शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी लंबे समय तक ‘वंदे मातरम्’ को वह सम्मान और स्वीकार्यता नहीं मिली, जिसका वह हकदार था। उन्होंने इस मुद्दे को कांग्रेस की राजनीति से जोड़ते हुए पार्टी पर निशाना साधा।

SSB की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
सिलीगुड़ी में SSB के कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया और नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं में SSB के लिए कैंप और आधारभूत ढांचे से जुड़े काम शामिल हैं। सरकार की ओर से इन परियोजनाओं को सीमा सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। SSB भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन सीमाओं की भौगोलिक परिस्थितियां कई जगहों पर चुनौतीपूर्ण हैं। ऐसे में जवानों के लिए बेहतर आवास, प्रशासनिक सुविधाएं, कैंप और आधुनिक आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराना सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जाता है।

‘दशकों तक वंदे मातरम् की अनदेखी हुई’: अमित शाह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश के राष्ट्रीय गीत को वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हकदार था। शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस तेज है। बीजेपी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर बीजेपी के रुख और अमित शाह के आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं।
अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ को केवल एक गीत के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और देश की राष्ट्रीय चेतना से जुड़े प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक, इसके ऐतिहासिक महत्व को लंबे समय तक पर्याप्त सम्मान नहीं मिला।

‘वंदे मातरम्’ पर क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजादी के बाद ‘जन गण मन’ को भारत का राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। हालांकि, समय-समय पर ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। हालिया विवाद में कांग्रेस की ओर से पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो अंतरे गाने के पुराने निर्णय को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है। बीजेपी ने कांग्रेस के इस रुख की आलोचना करते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान का मुद्दा उठाया है।

सीमा सुरक्षा पर भी अमित शाह का जोर
सिलीगुड़ी में अमित शाह ने सिर्फ राजनीतिक मुद्दों पर बात नहीं की, बल्कि सीमा सुरक्षा को लेकर भी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि जब तक देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक पश्चिम बंगाल और भारत पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह सकते। सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह संकरा भूभाग देश के पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। इसकी संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार यहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है। अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए ‘त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड’ की घोषणा भी की है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना है।

सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कोशिश
गृह मंत्री ने पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को लेकर भी राज्य सरकार के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा से संबंधित कार्यों के लिए जमीन उपलब्ध कराने को लेकर पहले केंद्र और राज्य के बीच मतभेद रहे हैं। अमित शाह ने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में BSF और SSB से जुड़े सीमा सुरक्षा कार्यों के लिए जमीन उपलब्ध कराने में तेजी दिखाई गई है। उन्होंने लगभग 1,129 एकड़ जमीन से जुड़े प्रबंध का भी उल्लेख किया।

अमित शाह के बयान का राजनीतिक मतलब
अमित शाह का ‘वंदे मातरम्’ वाला बयान केवल सांस्कृतिक मुद्दे तक सीमित नहीं है। इसे बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रही वैचारिक राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। बीजेपी लंबे समय से राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को अपनी राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस इस तरह के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने के लिए बीजेपी की आलोचना करती रही है। ऐसे में अमित शाह का ताजा बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

बयान को कैसे देखा जाए?
अमित शाह के इस बयान को देखने के दो प्रमुख पक्ष हैं। पहला पक्ष यह है कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है, इसलिए उसके ऐतिहासिक योगदान और सम्मान पर चर्चा स्वाभाविक है। दूसरा पक्ष यह है कि राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक विवाद में बदल सकती है।
इसलिए ‘दशकों तक वंदे मातरम् की अनदेखी हुई’ वाले बयान को ऐतिहासिक संदर्भ और मौजूदा राजनीतिक विवाद—दोनों नजरिए से देखना जरूरी है। तथ्य यह है कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और आज भी देश के राष्ट्रीय जीवन में इसका विशेष महत्व है।
सिलीगुड़ी में अमित शाह का पूरा कार्यक्रम हालांकि सीमा सुरक्षा और SSB के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित था, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ पर उनके बयान ने इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बना दिया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस बयान पर आगे क्या प्रतिक्रिया देती है और राष्ट्रीय गीत को लेकर चल रही बहस किस दिशा में जाती है।

