By: Mala Mandal
नई दिल्ली: मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। अब नया SIM कार्ड लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को सिम कार्ड जारी करने से पहले ग्राहक की पहचान को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए हैं। नए नियमों के तहत अब बिना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन यानी फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के नया SIM कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य फर्जी सिम कार्ड, साइबर अपराध और गलत पहचान के आधार पर जारी होने वाले मोबाइल नंबरों पर रोक लगाना है। सरकार लगातार डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन अपराधों को कम करने के लिए टेलीकॉम सेक्टर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही है।

नए SIM नियमों में क्या हुआ बदलाव?
पहले ग्राहक आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के जरिए SIM कार्ड खरीद लेते थे। कई जगहों पर डिजिटल KYC प्रक्रिया के माध्यम से भी सिम जारी किए जाते थे। लेकिन अब नए नियमों के तहत ग्राहक की पहचान की पुष्टि के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया लागू की जा रही है।अब नया सिम लेने वाले ग्राहक का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इसमें फिंगरप्रिंट स्कैन या फेस ऑथेंटिकेशन जैसी प्रक्रिया शामिल होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिम कार्ड वास्तव में उसी व्यक्ति के नाम पर जारी हो रहा है जिसकी पहचान प्रस्तुत की गई है।

फर्जी SIM और साइबर अपराध पर लगेगी रोक
देश में पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल नंबरों के जरिए होने वाले साइबर अपराधों में बढ़ोतरी देखी गई है। अपराधी अक्सर फर्जी दस्तावेजों या गलत पहचान के आधार पर SIM कार्ड हासिल कर लेते हैं और फिर उनका इस्तेमाल ठगी, बैंक फ्रॉड और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में करते हैं। नए नियम लागू होने के बाद ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद है। बायोमेट्रिक सत्यापन से यह पता लगाना आसान होगा कि कौन व्यक्ति किस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रहा है।

ग्राहकों को SIM लेने के लिए क्या करना होगा?
अगर आप नया SIM कार्ड खरीदना चाहते हैं तो आपको टेलीकॉम कंपनी के अधिकृत केंद्र या रिटेलर के पास जाना होगा। वहां आपकी पहचान से जुड़ी जानकारी की जांच की जाएगी। इसके बाद बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने पर ही SIM कार्ड एक्टिव किया जाएगा। ग्राहकों को अपना पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेज साथ रखने होंगे। इसके अलावा मोबाइल नंबर को अपने नाम पर लेने के लिए सही जानकारी देना अनिवार्य होगा।

पुराने SIM कार्ड पर क्या होगा असर?
नए नियम मुख्य रूप से नए SIM कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पर लागू होंगे। पुराने ग्राहकों को तुरंत अपना SIM बदलने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, अगर किसी नंबर की जानकारी संदिग्ध पाई जाती है या KYC से जुड़ी कोई समस्या सामने आती है तो टेलीकॉम कंपनियां दोबारा सत्यापन की मांग कर सकती हैं।

डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम
सरकार और टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय से मोबाइल नेटवर्क को सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठा रही हैं। मोबाइल नंबर आज बैंकिंग, UPI, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल सेवाओं से जुड़े होते हैं। ऐसे में SIM कार्ड की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। फर्जी पहचान से जारी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल रोकना डिजिटल इंडिया अभियान के लिए भी जरूरी माना जा रहा है। नए नियमों से ग्राहकों की पहचान अधिक सुरक्षित तरीके से सुनिश्चित हो सकेगी।

ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां
मोबाइल यूजर्स को भी अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति को अपना OTP, आधार से जुड़ी जानकारी या बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति के नाम पर बिना जानकारी के SIM जारी हो गया है तो वह टेलीकॉम विभाग की संबंधित सेवाओं के जरिए इसकी शिकायत कर सकता है।

SIM कार्ड जारी करने के नियमों में बदलाव का उद्देश्य ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना और फर्जी मोबाइल कनेक्शन पर रोक लगाना है। अब नया SIM लेने के लिए फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन जैसी बायोमेट्रिक प्रक्रिया जरूरी होगी। इससे मोबाइल नंबर से जुड़े साइबर अपराधों को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए यह बदलाव सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए ऐसे नियमों की जरूरत और भी बढ़ सकती है।

